सेंट्रल एक्साइज विभाग ऐसी फर्मों की कुंडली खंगाल रहा है, जो 10 साल से बिना पैन नंबर कारोबार करती आ रही हैं। विभागीय अफसरों की मानें तो 10 साल पहले भले ही पैन नंबर जरूरी नहीं था। लेकिन उसके बाद भी कई फर्मों ने पैन नंबर अपलोड नहीं किया। जो सीधे-सीधे गड़बड़ी की तरफ इशारा कर रहा है। माना जा रहा है कि 30 अगस्त तक की समयसीमा पूरी होने के बाद न केवल ऐसी फर्मों का टिन नंबर निरस्त किया जाएगा, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जाएगी।
प्रस्तावित जीएसटी बिल लागू होने की संभावना के बीच बिना पैन नंबर संचालित होने वालीं फर्मों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। वाणिज्य कर विभाग ने पैन नंबर को टिन नंबर के साथ वेबसाइट पर अपलोड कराने के लिए 30 अगस्त तक का अंतिम समय दिया है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि पैन नंबर ना देने वाली फर्मों का एक स्पेशल सेल पिछला रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। देखा जा रहा है कि इस दौरान कहां-कहां कितनी ट्रेडिंग हुई। पैन नंबर ना देने वाली काफी फर्म 10 साल से अधिक पुरानी है। जिस वक्त पैन कार्ड अनिवार्य नहीं था।
उसके बाद पैन नंबर अनिवार्य किया गया। लेकिन तब भी ये फर्म चुप्पी साधे रहीं। वाणिज्य कर विभाग वर्ष 2013 से पैन कार्ड नंबर हर फर्म के टिन नंबर के साथ अपडेट कराने की प्रक्रिया चला रहा है। विभाग का मानना है कि इनमें से कई फर्मों की ट्रेडिंग प्रदेश के बाहर होती है, या फिर फर्म में तैयार होने या सप्लाई होने वाले सामान केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क के दायरे में आते हैं। इन सभी तथ्यों की खोजबीन की जा रही है।