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यूपी में मायावती ने फिर खेला ब्राह्मण कार्ड

Fri, 19 Apr 2013 09:35 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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ब्राह्मण शंख बजाएगा-हाथी दिल्ली जाएगा.. हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है.. बहन जी के सम्मान में-ब्राह्मण समाज मैदान में, जैसे चिरपरिचित नारों के बीच मायावती ने यूपी में एक बार फिर ब्राह्मण कार्ड पर दांव लगाया है।
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बहुजन समाज पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए 36 प्रत्याशियों की सूची गुरुवार को जारी कर दी। इस सूची में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए प्रदेश में आरक्षित 17 सीटों के साथ ब्राह्मण समाज के 19 प्रत्याशी शामिल हैं।

प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक करने के साथ ही मायावाती ने पिछले विधानसभा चुनाव में रूठे ब्राह्मणों को मनाने और हाथी को दिल्ली की गद्दी पर पहुंचाने का ऐलान कर दिया है।
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उन्होंने अपने प्रत्याशियों को उम्मीद बंधाई है कि यदि 2007 की तरह ब्राह्मण-दलित एक हुआ तो यूपी में ऐसा रिजल्ट आएगा कि केंद्र में बसपा की सरकार होगी।..बाकी चार साल के जुल्म-ज्यादती सहने से फुर्सत मिल जाएगी।

वजह, तब यूपी का राज्यपाल उनके अनुसार काम करेगा... अभी तो केंद्र को सूबे के हालात की सही रिपोर्ट भी नहीं भेजता। तब प्रदेश की जुल्मी सरकार को पांच साल के पहले ही बर्खास्त कर दिया जाएगा। इसमें बिलकुल भी देर नहीं लगेगी।

ब्राह्मणों को मनाने में जुटी मायावती 

मायावती ने विधानसभा चुनावों में उनसे रूठ चुके ब्राह्मणों को मनाना भी शुरू कर दिया है।

ब्राह्मण समाज भाईचारा संगठन के सम्मेलन में मायावती ने ब्राह्मणों की पार्टी से नाराजगी दूर करने के लिए सरकार के पांच सालों में ज्यादा कुछ न कर पाने की मजबूरी भी बताई।

मायावती ने कहा कि 2007 में जब सत्ता मिली थी तो खजाना खाली था। केंद्र से 80 हजार करोड़ रुपये का पैकेज मांगा जिसमें उसने एक रुपये नहीं दिया। ऐसे में वह मजबूर थीं।

मायावती ने जोर देकर यह समझाने की कोशिश की आजादी के 55 सालों में कांग्रेस व अन्य दलों की सरकारों में उपेक्षा की वजह से अगड़े लोग खासकर ब्राह्मण जो हासिल नहीं कर पाए वह पांच साल में कैसे संभव था? इसके बावजूद उन्होंने सपा सरकार द्वारा बंद की गई अगड़े लोगों की भर्तियां शुरू कराई।

उनके हाथ में लॉ एंड आर्डर था जिसमें शिकायत का मौका नहीं दिया। तब गुंडे, बदमाश और माफिया या तो जेल में थे या प्रदेश से बाहर भाग गए थे।

सपा राज में जो पीड़ित थे उन्हें एफआईआर कर न्याय दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया। दलित महापुरुषों के नाम पर भी जो योजना बनाई उसमें सर्वसमाज को लाभ दिया।

माया ने कहा कि ऐसे में मेरी लाचारगी और मजबूरी को समझे बिना लालच में आकर गुमराह होना ठीक नहीं रहा। अब सपा सरकार को सबसे ज्यादा गाली कोई दे रहा है तो ब्राह्मण समाज के लोग।

वजह, वे भी दलितों की ही तरह सताए जा रहे हैं। दलित तो इस हुकूमत में जुल्म सहने को अपनी नियति मान चुका है लेकिन ब्राह्मण समाज इस तरह की ज्यादती बर्दाश्त नहीं कर पा रहा।
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बसपा महासचिव सतीशचंद्र मिश्र ने कहा कि यूपी में 16 प्रतिशत ब्राह्मण और 22 प्रतिशत दलित एक हो जाय तो ऐतिहासिक रिजल्ट आने से कोई नहीं रोक पाएगा।
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