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केरमा रेल क्रासिंग बंद करने के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण

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मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ)। रेलवे विभाग द्वारा मानव विहीन रेल समपारों को बंद करने के आदेश पर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। अभी तहसील क्षेत्र के बरहदपुर गांव में अंडरपास बनाने को लेकर ग्रामीण विगत 12 दिनों से धरना कर रहे हैं तो अब उसी के बगल में केरमा गॉव के पास 16 सी रेलवे क्रॉसिंग को जबरन बंद किए जाने के आदेश की जानकारी के बाद गांव के लोग उद्वेलित हैं। रेलवे विभाग की मनमानी और समपार को बंद करने के खिलाफ आज से धरना पर बैठने का ऐलान किया है। रेल समपार बन्द के खिलाफ क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यंत्रों से जागरूक किया जा रहा है।
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मुहम्मदाबाद गोहना तहसील आजमगढ़ मुख्य मार्ग से केरमा गांव को जाने वाले रेल समपार को भी बंद किए जाने का आदेश जारी हुआ है। इसके लिए 30 दिसंबर को पुलिस बल के साथ उक्त समपार को बंद किए जाने का आदेश हुआ है। हालांकि इसके पहले ही विभाग के आदेश के खिलाफ क्षेत्र के कुतुबपुर गॉव के ओमप्रकाश पुत्र रामप्रीत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल किया है जिस पर आगामी 4 जनवरी को सुनवाई होनी है। लेकिन उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका को दरकिनार कर विभाग ने 30 दिसंबर को उक्त समपार को बंद करने का निर्देश दिया है।
इस बात की जानकारी होने पर कर केरमा गांव के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिनेश राय ने रेल विभाग के आदेश को मनमानी बताते हुए इसे जनता के साथ अन्याय बताया है। कहना है कि सैकड़ों साल से उक्त रेलवे क्रॉसिंग से केरमा, कुतुबपुर, लक्ष्मण पट्टी, पटखौली, कादीपुर, कादीपुर बस्ती आदि समेत दर्जनों गांव के लोगों का इस समपार से आना जाना होता है। इस मार्ग को बंद कर दिए जाने से आवागमन की काफी समस्या होगी। इसको लेकर 29 दिसंबर से ग्रामीण उक्त 16सी समपार पर धरना पर बैठेंगे। श्री राय ने कहा कि आदेश वापस लिए जाने तक ग्रामीणों का धरना जारी रहेगा। इसके लिए रेल संघर्ष समिति का भी गठन किया गया है जो रेल हितों की लड़ाई के लिए संघर्ष करती रहेगी।
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मुहम्दाबाद गोहना उप जिलाधिकारी मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि 16सी केरमा रेलवे क्रॉसिंग को बंद किए जाने के आदेश की अभी तक मुझे कोई संज्ञान नहीं है। उच्च अधिकारियों द्वारा इस संबंध में जो भी आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा।
आजमगढ़ आरपीएफ के प्रभारी निरीक्षक रमेश चंद्र मीणा ने बताया कि 16 सी रेल फाटक को 30 दिसम्बर को बंद किए जाने का आदेश जारी हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके खिलाफ जनहित याचिका माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। लेकिन न्यायालय से कोई स्थगन आदेश नहीं मिला है इसलिए विभागीय आदेश का पालन कराया जाएगा।
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