मऊ। परिवहन विभाग की तमाम कोशिशोें को बाद भी जिले की सड़कों पर हजारों की संख्या में वाहन बिना मानक पूरा किए ही सड़क पर दौड़ लगा रहे हैं। मानकों की अनदेखी कर फिटनेस फेल होने के बाद भी निजी व व्यवसायिक वाहन फर्राटा भरते देखे जा सकते हैं। इस कारण कई बार हादसे में लोगों की जान चली जाती है। आलम यह है कि माल वाहनों की की बाडी मानक के विपरीत है तो काफी संख्या में वाहनों की बैकलाइट ही नहीं है। जिले में जुगाड़ गाडियों के साथ ट्रैक्टर ट्राली व टैम्पो मानक के विपरीत चल रहे हैं।
जिले में हजारों वाहन फिटनेस का मानक पूरा नहीं करते। इनमें प्राइवेट बस, ट्रैक्टर-ट्राली, डीसीएम, टैम्पो तथा अन्य वाहन शामिल हैं। जिले में वर्ष 2021 अप्रैल माह में 14 बसें, 3 ई-रिक्शा, 110 माल वाहक, 16 मोटर कैब, 13 मैक्सी कैब, आठ आटो रिक्शा माल वाहक, 165 आटो रिक्शा सवारी वाहन अनफिट हुए हैं। जबकि मई माह में 17 बसें, 2 ई-रिक्शा, 97 माल वाहक, नौ मोटर कैब, आठ मैक्सी कैब, 23 आटो रिक्शा माल वाहक, 193 आटो रिक्शा सवारी वाहन अनफिट हुए। जिले में इन अनफिट वाहनों को कारण हर रोज कहीं ना कहीं दुर्घटनाएं हो रही हैं। बावजूद इसके सड़कों पर खटारा वाहन बेखौफ चल रहे हैं।
हालांकि कोरोना काल के चलते वाहन चालकों को फिटनेस को लेकर शासन ने छूट दे रखी है। लेकिन खटारा वाहन लोगों को जान का खतरा बनी हुई हैं। जिले में कामर्शियल वाहनों की हालत सबसे बुरी है। कई वाहनों की बॉडी पूरी तरह से जर्जर हो गई हैं। लेकिन फिर भी वह सड़कों पर बिना भय के चल रही हैं। इसके साथ ही वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों की अनदेखी कर वाहन चलाना खतरनाक साबित हो रहा है। विभाग द्वारा चेकिंग के नाम पर मजह खाना पूर्ति कर दी जाती है।
एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना काल को लेकर 30 सितंबर तक वाहनों के फिटनेस, परमिट, आरसी व डीएल की वैद्यता बढ़ा दी गई है। उसके बाद सभी को वैद्यता खत्म होने की दशा में फिर से प्रामणपत्र लेना होगा। परिवहन विभाग की तरफ से व्यवसायिक व निजी दो तरह का फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। नए व्यवसायिक वाहन को दो वर्ष का फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। उसके बाद हर वर्ष फिटनेस प्रमाण पत्र लेना होता है।