इसको लेकर किसान रामनवल राही, उजागिर, अशोक गोंड़, हरिश्चन्द्र, सुदामा, बबलू सिंह,रमाकांत सुरेश मुरलीधर, संजय सिंह आदि की बुआई की गई जमीन जलमग्न है। किसानों ने आरोप लगाया कि है कि अभी एक सप्ताह पूर्व ही नहर के टूटने से 500 बीघा फसल डूब गई थी। उस समय ही किसानों ने जिम्मेदारों से नहर का मरम्मत कराने की मांग की थी। लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई न हुई, जिसके चलते फिर नहर टूटने से एक बार फिर किसानों की फसल जलमग्न हो गई।