इंदारा-दोहरीघाट रेलमार्ग के कार्य ने पकड़ी रफ्तार, जल्द मिलेगी सौगात
तीन ब्लाकों के 100 गांवों के एक लाख से ज्यादा आबादी होगी लाभांवित
अमर उजाला ने धीमी गति से कार्य होने पर बीते माह में उठाया था मुद्दा
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। पांच वर्षों से आमान परिवर्तन का कार्य अगामी चार से पांच माह में पूरा होने की संभावना प्रबल होती दिख रही है। दरअसल रेलवे ने 2022 में इस कार्य को पूरा करने के लिए वर्तमान में युुद्धस्तर पर कार्य कर रहा है। इंदारा से दोहरीघाट के बीच बन रहे अधिकांश पुलों का कार्य हो चुका है, वहीं अब शेष चार पुलों का कार्य पूरा होने के बाद विद्यतीकरण का काम शुरू किया जाएगा। अब तक रेलवे द्वारा करीब 80 फीसदी तक कार्य पूरा किया जा चुका है। इस कार्य के पूरा होने से पांच वर्षों से इंदारा-दोहरीघाट रेलमार्ग पर बंद संचालन शुरू होने से तीन ब्लाकों के 100 गांवों के लाखों लोगों को आवाजाही सुगम हो सकेगी।
इंदारा-दोहरीघाट पर छोटी रेललाइन मार्ग पर रेल बस का संचालन किया जाता था। वर्ष 2014 में भाजपा सरकार ने रेल बजट में 35 किमी इस छोटी रेल लाइन को बड़ी रेल लाइन में बदलने के लिए आमान परिवर्तन की स्वीकृति दी। 35 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग के लिए 165 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ था। 20 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने इंदारा जंक्शन पर आमान परिवर्तन की आधारशिला रखी।
शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पूर्वोत्तर रेलवे के तत्कालीन महाप्रबंधक राजीव मिश्रा ने बताया था कि आमान परिवर्तन का यह कार्य वर्ष 2018 में पूरा होने की बात कही थी। एक फरवरी 2018 को केंद्र सरकार द्वारा पेश बजट में आमान परिवर्तन के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की गई थी। साथ ही रेलवे को यह कार्य इंदारा-दोहरीघाट अमान परिवर्तन कार्य वर्ष 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन समय सीमा के दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी बीते जुलाई माह तक 65 फीसदी तक कार्य पूरा हो सका था। करीब पांच वर्ष बाद भी अमान परिवर्तन कार्य पूरा न होने से कोपागंज, दोहरीघाट, घोसी ब्लाक के 100 गांवों के लोगों को आवाजाही के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस समस्या को लेकर अमर उजाला द्वारा बीते माह में छह जुलाई को शिलान्यास के पांच वर्ष बाद भी इंदारा-दोहरीघाट रेलमार्ग अधूरा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद रेलवे अधिकारियों द्वारा इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेकर युद्धस्तर पर कार्य कराया जा रहा है। इसके तहत कोपागंज, घोसी रेलवे स्टेेशनों पर अधूरे यात्री सुविधाओं को पूरा कराने के साथ युद्धस्तर पर रेल पटरी बिछाने के दूसरे कार्यो को पूरा किया जा रहा है।
इस बाबत आमान परिवर्तन के एईएन अनिल कुमार सिंह ने बताया कि कार्य लगभग 80 फीसदी ही पूरा चुका है। दोहरीघाट-अमिला तथा घोसी के बीच पुल का निर्माण करने के बाद दिसंबर या जनवरी माह तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
लापरवाही, बजट की कमी बनी वजह
मऊ। घोसी, दोहरीघाट तथा कोपागंज ब्लाक के लोग इस आमान परिवर्तन कार्य का पूरा होने का इंतजार काफी बेसब्री से कर रहे है। कार्य को पूरा कराने को लेकर कई बार काम ठप होने पर लोगों द्वारा विरोध जताने के साथ रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंप चुके है। आमान परिवर्तन का कार्य ऐसे तो वर्ष 2019 तक पूरा हो जाना चाहिए था।लेकिन कभी बजट का अभाव तो कभी जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते यह लंबा खिंचता दिख रहा है। जहां बजट न होने से शिलान्यास करने के दो वर्ष से अधिक समय बाद कार्य शुरू किया गया। जब कार्य शुरू किया गया तो एक वर्ष के भीतर इसे पूूरा करने का लक्ष्य भले ही निर्धारित किया गया लेकिन बीच बीचमें बजट की कमी के चलते कई-कई माह तक कार्य बंद होता रहा।