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रेलवे अधिकारियों के आने पर चलती है स्टेशन की स्वचलित सीढ़ी

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मऊ। मऊ जंक्शन पर लाखों रुपये की लागत से बना एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ी) के आए दिन बंद रहने से यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी वृद्धजनों, दिव्यांगों, महिलाओं को उठानी पड़ती है। इस समस्या को लेकर निरीक्षण करने आने वाले रेलवे के आला अधिकारियों को लोगों ने ज्ञापन सौंप चुके है, लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। लोगों का आरोप है कि यह एस्केलेटर वहां के रेलवे अफसरों व वहां आने वाले वीआईपी की सेवा में लगी रहती है। यात्रियों की सुविधा के लिए बनी यह लाखों की स्वचलित सीढ़ी केवल शोपीस बन रह गई है।
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आदर्श श्रेणी के मऊ जंक्शन पर रेलवे की ओर से यात्रियों की सुविधाओं के लिए सभी अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान की गई है। स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ी का निर्माण हुआ था लोगों में बेहतर सुविधाएं की आस जगी, लेकिन स्थानीय रेलवे अधिकारियों की मनमाना रवैया तथा लापरवाही से लोगों के इस सपने पर ग्रहण लग गया है। फलस्वरूप मऊ जंक्शन पर आए दिन तकनीकी खामी के चलते स्वचालित सीढ़ी बंद रहती है। जब किसी वीआईपी रेलवे अधिकारी के निरीक्षण का समय आता है तो उस समय स्वचालित सीढ़ी चालू कर दी जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी दिव्यांगों, बुजुर्गों एवं महिलाओं को उठानी पड़ रही है। आए दिन स्वचालित सीढ़ी बंद रहती है।
इस संबंध में व्यापारी नेता गोपाल कृष्ण बर्नवाल, साड़ी व्यवसायी सुरेश कल्यानिया का कहना है कि स्टेशन पर लाखों की लागत से बनी स्वचालित सीढ़ी विभागीय लापरवाही से यात्रियों के लिए अनुपयोगी साबित हो रही है। विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। मऊ के प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्री किरन मिश्रा, जवाहर यादव, संजय वर्मा का कहना था कि मऊ जंक्शन पर आए दिन स्वचालित सीढ़ी बंद रहती है। इसकी शिकायत कई बार विभाग के आला अधिकारियों से की गई थी, बावजूद इसके व्यवस्था में कोई भी सुधार नहीं हो रहा है। स्वचालित सीढ़ी का संचालन सही तरीके से नहीं होने के कारण प्लेटफार्म तक पहुंचने में काफी असुविधा का सामना करना पड़ा। बढुआगोदाम से वाराणसी के लिए ट्रेन पकड़ने के लिए आई यात्री जानकी सिंह ने बताया कि स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ी तो बनी है, लेकिन सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्लेटफार्म तक पहुंचने में असुविधा हुई। स्टेशन पर शिकायत करने पर आश्वासन देकर मामले को टाल दिया जाता है।
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