मऊ। वाराणसी गोरखपुर नेशनल हाइवे के बचे भाग की मरम्मत की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को दे दिया है। फोरलेन से बचे भाग की सड़क की मरम्मत लोक निर्माण विभाग ने एक वर्ष पूर्व कराया था। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत और पिचकरण तो विभाग ने करा दिया था। लेकिन उसकी पटरियों को जस का तस छोड़ दिया गया। केवल बलिया मोड़ से आफिसर्स कालोनी तक पटरियों पर बगल से जेसीबी से मिट्टी खोदकर डाल दिया गया था। जो बरसात होने पर फिर उन्हीं गढ्ढों में बह गई। वह भी पहले की स्थिति में पहुंच गई।
नेशनल हाइवे की सीमा जनपद के बढ़ुआगोदाम से दोहरीघाट तक है। वाराणसी गोरखपुर फेरलेन सड़क पर बन रहा है। जिला मुख्यालय, कोपागंज, घोसी और दोहरीघाट कसबों के पास बाई पास बनाया गया है। बाईपास को छोड़कर शेष भाग पर फोरलेन का निर्माण हो रहा है। लेकिन फोरलेन से बचे शेष नेशनल हाइवे की हालत काफी जीर्णशीर्ण हो गई थी। केंद्र सरकार ने उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को दे दी।
पिछले वर्ष जुलाई माह में नेशनल हाइवे के पुरानी सड़क की मरम्मत लोकनिर्माण विभाग ने ठेकेदारों के माध्यम से कराई। ठेकेदारों ने पिच तो करा दिया लेकिन पटरियों को ज्यों का त्यों छोड़ दिया। बलिया मोड़ से आफिसर्स कालोनी तक सड़क के बगल से जेसीबी से मिट्टी उठाकर पटरियों पर डाल दी गई ,उसे समतल भी नहीं किया गया। बरसात होने पर वह मिट्टी बहकर फिर उन्हीं गढ्ढों में चली गई जहां से मिट्टी निकाली गई थी। जिससे पटरियां पहले की ही स्थिति में पहुंच गईं। चूंकि फोर लेन अभी चालू नहीं हुआ है। इसलिए नेशनल हाइवे पर ही सारे छोटे बड़े वाहनों का आवागमन होता रहता है। पटरियों के क्षतिग्रस्त रहने से प्राय: हादसे होते रहते हैं। खासकर छोटे और तिपहिया वाहन असंतुलित होकर पलट जाते हैं। सड़क ऊंची और पटरियां नीचे होने से दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बढ़ुआगोदाम से दोहरीघाट तक फोरलेन से बचे भाग के सड़क की मरम्मत लोक निर्माण विभाग द्वारा कराई गई है। पटरियों की मरम्मत न किए जाने तथा उनके क्षतिग्रस्त होने के बारे में जानकारी नहीं है, उसे चेक कराता हूं। मरम्मत के लिए मिले बजट के बारे में देखना पड़ेगा।