मऊ। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग हर त्योहार पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए भेजता है। इनमें से 40 फीसदी नमूने फेल हो जाते हैं। कुछ अधोमानक तो कुछ पूरी तरह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
विभाग इन मिलावटखोरों के खिलाफ मुकदमा दायर करके जुर्माना लगाता है, उसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी रहती है।
दुकानदारों के खिलाफ जुर्माना तो लगा दिया जाता है, लेकिन इनका सेवन कर नुकसान उठाने वालों को मुआवजे का प्रावधान नहीं है। दीपावली पर अभियान चलाकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने संदेह के आधार पर चारों तहसीलों से 30 नमूने जांच के लिए भेजे थे। होली पर आई रिपोर्ट में 13 नमूने फेल हो गए। इनमें कचरी और खाद्य रंग अधोमानक (मानक से विपरीत) पाए गए।
दूध से बनी मिठाइयां और लड्डू के छह नमूने हानिकारक पाए गए। इन सात दुकानदारों के खिलाफ एडीएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया है। दूध के उत्पादन की अपेक्षा मांग अधिक होना इसकी बड़ी वजह है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा हर साल लोगों को जागरूक किया जाता कि मिलावटखोरी से बचें। दुकानदारों से भी मिलावट न करने को कहा जाता है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि त्योहारों के समय लैब में पूरे प्रदेश से जांच के लिए नमूने भेजे जाते हैं। हजारों नमूनों की जांच करने और रिपोर्ट तैयार करने में काफी समय लग जाता है। सामान्य दिनों में भेजे गए नमूनों के रिपोर्ट एक से दो सप्ताह में आ जाता है।