मऊ। अब केंद्र सरकार की तरफ से ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत तथा टिकाऊं सड़कों का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत नई तकनीक एफडीआर से जिले में 12 हजार 375 लाख की लागत से 118 किमी लंबी सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू होगी।
जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़कें गड्ढे में तब्दील हो गई है। सड़कों पर वाहन से चलना तो दूर पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। केंद्र सरकार की तरफ से 17 ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों का निर्माण अब एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लिेमेशन) तकनीक से होगा। लगभग 12 हजार 375 लाख की लागत से 118 किमी. लंबी इन सड़कों के निर्माण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस नई तकनीक से बनने वाली सड़कों निर्माण ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से होगा। निर्माण कार्य में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की तरह की बड़ी-बड़ी मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। हाईटेक मशीनें पुरानी सड़कों को खोदेगी। फिर नए तरीके से सड़कों का निर्माण कार्य शुरू करेंगी। अधिकारियां की मानें तो इस तकनीक से सड़क निर्माण में बाहर का कोई सामान नहीं लगाया जाएगा बल्कि केमिकल और सीमेंट को मिलाकर मजबूती से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस तकनीक से बनने वाली सड़कें कम से कम 10 साल तक नहीं टूटेंगी। पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की अवधि पांच वर्ष तक ही होती थी।
इन सड़कों का होगा निर्माण
कोइरियापार से मीरपुर, मोलनापुर से दुुबारी, इकौनाचौबेपुर रोड, रानीपुर-सुल्तानीपुर मार्ग, बरलाई से पूराघाट, रतनपुरा से भीमपुरा, इटौरा से सरसेना, बनगांवा से पीढ़वल, मुहम्मदाबाद से जीयनपुर, करहां से जहानागंज, हलधलपुर से अइलख, मऊ से इटौरा सहित कुल 17 सड़क शामिल हैं।
क्या है एफडीआर तकनीक
ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के निर्माण के लिए नई तकनीकी एफडीआर (फुल डेफ्थ रेक्लेनेशन) से किया जाएगा। अत्याधुनिक मशीनों से उस सड़क को उखाड़कर कंक्रीट से बनाया जाता है। इस तकनीक से सड़क निर्माण में बाहर का कोई सामान नहीं लगाया जाएगा। बल्कि केमिकल और सीमेंट को मिलाकर मजबूती से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इस तकनीक से बनने वाली सड़कें कम से कम 10 साल तक नहीं टूटेंगी।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि एफडीआर तकनीक से जिले में 12375 लाख की लागत से 118 किमी लंबी सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।