क्षय रोग (टीबी) की जांच और तेज जांच के लिए जिले में राज्य स्तर से पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन भेजी गई। क्षय रोग कार्यालय पर मशीन को स्टॉल भी कर दिया है। इससे घर-घर जाकर टीबी की जांच हो सकेगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. हंसराज सोनी ने बताया कि इस मशीन को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। मशीन से पांच मिनट में एक्स-रे किया जा सकता है। साथ ही इसमें रेडिएशन की मात्रा बेहद कम होती है।
उन्होंने बताया कि यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस है, जो एक्स-रे रिपोर्ट का विश्लेषण कर सटीक और त्वरित परिणाम देती है। इससे टीबी की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान संभव हो सकेगी।वर्तमान में 3200 टीबी मरीज सक्रिय हैं।
इस साल 5100 मरीज खोजी अभियान के तहत मिले थे। इसमें 1900 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। उधर मरीजों को तत्काल चिन्हित करने के लिए शासन ने जिले को यह अत्याधुनिक एक मशीन उपलब्ध कराई है, ताकि टीबी की समय पर पहचान कर रोग के प्रसार को रोका जा सके।
जरूरत पड़ने पर मशीन को मरीज के घर स्वास्थ्य शिविरों और विशेष जांच कैंपों में तक ले जाया जा सकता है। डॉ. सोनी ने बताया कि इस मशीन का उपयोग मुख्य रूप से संवेदनशील जनसंख्या की जांच के लिए कैंप लगाकर किया जाएगा।
......
जहां मरीज मिलने की संभावना, वहां हो रही है जांच
टीबी क्लिनिक के डीपीएमसी जयदेव यादव ने बताया कि 10 दिसंबर को यह मशीन मिली थी। इसको लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण पांच स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया। अब इस इसे कैंपों के माध्यम से इसकी जांच होगी।इसमें प्राथमिकता उन जगहों को दिया जाएगा, जहां टीवी के मरीजों के मिलने की उम्मीद है। बताया कि एक मशीन और मिलने की उम्मीद है, इससे और सुविधा होगी। वर्तमान में कैंपों में जांच बलगम से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर की जाती है।
आम व्यक्तियों को विभाग दे रहा हैं 500 रुपये
डा. हंसराज सोनी ने बताया कि टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग नई कवायद में जुटा है। इसके तहत टीबी के नए संदिग्ध मरीजों की सूचना अगर देता हैं और वो मरीज जांच में पॉजिटिव आता है तो विभाग उसे पांच सौ रुपया दे रहा है। अब तक ऐसी सूचना देने वाले दस से ज़्यादा लोगों को इसका लाभ मिल चुका है।लेकिन अधिकांश जागरूक मरीज खुद आकर जांच करा कर इसका लाभ उठा रहे हैं।
क्या है खास इन नई मशीनों में
ये एक्स-रे डिवाइस छोटी, पोर्टेबल और बैटरी से चलने वाली होती हैं, जिन्हें कहीं भी ले जाया जा सकता है. इन मशीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता है, जिससे टीबी का संक्रमण तुरंत पहचाना जा सकता है। मशीनें क्लाउड स्टोरेज और टेली-रेडियोलॉजी की सुविधा देती हैं, जिससे एक्सपर्ट डॉक्टर कहीं से भी रिपोर्ट देख सकते हैं।