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Mau News: शहर में 12 में से सिर्फ 1 हाईड्रेंट बचा, तीन तहसीलों ने जरूरत ही नहीं समझी

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शहर में कहीं भी आग लगने पर दमकल वाहनों को पानी देने के लिए कागजों पर 12 हाईड्रेंट बने हैं। लेकिन इसमें एक का ही अस्तित्व बचा है। दरअसल नगर के मुख्य बाजारों में लगे हाइड्रेंट सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ च़ुके हैं। वहीं तीन तहसीलों मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी नगर पंचायत के जिम्मेदारों ने अब तक अपने यहां सार्वजनिक जगहों पर हाइड्रेंट लगाने की जरूरत ही नहीं समझी है।
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मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत के गांधीनगर में बीते मंगलवार की रात गोदाम में लगी आग की घटना के बाद हाईड्रेंट न होना और सभी निकायों के प्रमुखों का इस संबंध में गंभीर न होना नियमों की अनदेखी है। जबकि नियमानुसार सार्वजनिक जगहों पर हाईड्रेंट की सुविधा होनी चाहिए, इससे कोई घटना होने पर पानी खत्म होने पर इन हाईड्रेंट से पानी भरा जा सकें। दूसरी तरफ निकायों के जिम्मेदारों का तर्क है कि हाईड्रेंट के बजाए ऐसी घटनाओं पर ओवरहेड टैंक लगे नलकूप से पानी की आपूर्ति की जाती है।
नगर में आग लगने की घटना से बचाव की व्यवस्था के तहत न दमकल को पानी मुहैया कराने के लिए शहर में अलग से लाइन बिछाकर कोतवाली, गाजीपुर तिराहा, आजमगढ़ मोड़, माता पोखरा, मिर्जाहादीपुरा सहित 12 स्थानों पर हाईड्रेट प्वाइंट बनाए थे। बीच-बीच में सड़क के चौड़ीकरण व ऊंचा करने के दौरान यह दब गए। वर्तमान में केवल फायर बिग्रेड कार्यालय के सामने ही एक मात्र हाईड्रेंट अपने अस्तित्व में है, बाकी जो हाइड्रेंट हैं वह सड़क चौड़ीकरण की भेंट चढ़ चु़के हैं। चौंकाने वाली बात है कि इसको लेकर नई जगहों पर न तो हाइड्रेंट बनाने की कवायद हुई न ही पुराने ही हाईड्रेंटों को ही उच्चीकरण कर उन्हें कार्य लायक बनाया गया है।
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हाईड्रेंट की सबसे ज्यादा जरूरत उस समय सामने आई जब बीते मंगलवार की रात मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत के गांधी नगर स्थित गोदाम में भीषण आग लगी की घटना हुई, जहां जिले की पांच दमकल गाड़ियों के अलावा आजमगढ़ जिले के एक दमकल गाड़ी आग बुझाने में लगी थी, जहां पानी खत्म होने पर लोगों के सबमर्सिबल के साथ नगर पंचायत के नलकूप से पाइप लगाकर दमकल गाड़ियों में पानी भरा गया। वहीं, नगर पालिका मऊ के जिम्मेदारों का दावा है कि हाईड्रेंट न होने की स्थिति में गाजीपुर तिराहा कपलिंक, स्वदेशी कॉटन मिल, शाही कटरा, माता-पोखरा के नलकूप से वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
हर साल बढ़ रही हैं आग लगने के मामले
अग्नीशमन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हर वर्ष आगलगी की घटना का ग्राफ बढ़ रहा है। 2021 में जहां 135 आगलगी की घटना हुईं थीं, वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 150 हो गई थी। इसीक्रम में 2023 में 155, जबकि 2024 में 160 से ज्यादा घटना हो चुकी हैं। इसमें 80 फीसदी आगलगी की घटना अप्रैल, मई, जून में होती हैं। वहीं, दूसरी तरफ आग लगने की घटना को लेकर बचाव करने वाले दमकलकर्मियों की कमी है। जिला मुख्यालय सहित तीन अन्य तहसील मुहम्मदाबाद गोहना, घोसी, मधुबन में सीएफओ सहित 50 दमकलकर्मी हैं। जबकि एक फायर स्टेशन पर 16 फायर मैन, एक दरोगा, दो लीडिंग फायर मैन, दो दीवान, दो चालक, एक कुक की तैनाती होती है। इसके सापेक्ष जिला मुख्यालय पर सीएफओ सहित 27 दमकलकर्मी की तैनाती है। मधुबन में तीन फायर मैन, एक चालक, मुहम्मदाबाद गोहना में चार फायर मैन, एक चालक, घोसी में बन रहा फायर स्टेशन अभी शुरू नहीं हुआ है।
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क्या होता हैं हाइड्रेंट, क्यों होती हैं इसकी जरूरत
शहर या नगरीय कस्बे में घनी आबादी और संकरे बाजारों में आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड कर्मियों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनमें से एक पानी की अतिरिक्त जरूरत के लिए आवागमन में आने वाली परेशानी सबसे प्रमुख है। इसी समस्या के निदान के लिए सार्वजनिक जगहों पर हाईड्रेंट बनाया जाता हैं, जिससे ऐसी घटना पर फायर बिग्रेड कर्मियों को पानी खत्म होने पर इसे दोबारा भरने में कोई दिक्कत न हो।
नए हाईड्रेंट के लिए बनेगी योजना
हाईड्रेंट को लेकर नगर पालिका ईओ दिनेश कुमार का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण में अधिकांश हाईड्रेंट दब गए हैं, उसके लिए नए हाईड्रेंट को लेकर योजना है। वर्तमान में नलकूपों से पानी की व्यवस्था की जाती हैं। वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष इंदू देवी मुहम्मदाबाद गोहना ने बताया कि अभी तक नगर में हाईड्रेंट की व्यवस्था नहीं है, लेकिन इसको जल्द ही सर्वे कर हाईड्रेंट लगाने की योजना को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
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