मऊ। शहर के बाल निकेतन के पास रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया जो अंतिम चरण में पहुंच गई है। अब उसमें अड़ंगेबाजी शुरु हो गई है। श्री गंगा तमसा मिशन के मंत्री और पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी ने ओवरब्रिज न कराने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर किया है। हाई कोर्ट के चीफ स्टैंडिंग कौसिल जेएन मौर्य ने जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को नोटिस भेजा है। छोटेलाल गांधी की इस याचिका के बाद नगर के लोगों में एक अलग तरह की चर्चा शुरु हो गई है।
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में पूर्व सभासद छोटेलाल गांधी ने कहा है कि बाल निकेतन पर रोलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज निर्माण न किया जाए। इस स्थान पर ओवर ब्रिज बनने से सरकार को काफी धन खर्च करना पड़ेगा। बिना ओवर ब्रिज निर्माण के भी यहां काम चल सकता है। इसलिए इसके बदले किसी अन्य विकल्प पर विचार किया जाए। इस बारे में उच्च न्यायालय के चीफ स्टैंडिंग कौसिल के जेएन मौर्य ने 28 सितंबर 2021 को जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि ओवर ब्रिज निर्माण के बाबत निर्माण दायी संस्था को आदेश निर्गत करने को कहा गया है। याचिका में जिलधिकारी और अपर जिलाधिकारी को पार्टी बनाया गया है।
बता दें कि काल निकेतन रेलवे क्रासिंग के पास ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति रेलवे बोर्ड और उत्तर प्रदेश शासन की ओर से दे दी गई है। ओवर ब्रिज निर्माण के लिए सर्वे भी किया जा चुका है।ओवर ब्रिज निर्माण की जद में आने वाले मकानों और जमीनों को चिह्नित किया जा चुका है। ओवर ब्रिज निर्माण में 95 करोड़ की लागत आएगी।ओवर ब्रिज निर्माण में 296 मकान ,दुकान अथवा जमीन आ रही हैं।ओवर ब्रिज के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर पद्रेश सेतु निगम को दी गई है। कुछ ही महीनों में सेतु निगम निर्माण कार्य शुरु करने वाला है। शहर के लोगों का कहना है कि ओवर ब्रिज न बनने से बाल निकेतन पर रेलवे फाटक बंद हो जाने पर तीनों तरफ वाहनों की लंबी लंबी लाइनें लग जाती है। भारी जाम लग जाता है जिसे हट पाने आधे घंटे से एक घंटे तक लग जाते हैं। ओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति मिल जाने से लोगों में यह आस जगी थी कि कुछ ही समय में यहां लगने वाले जाम से मुक्ति मिल जाएगी।
इस मामले में अपर जिलाधिकारी केहरी सिंह का कहना है कि अभी तक तो इस प्रकार के नोटिस मिलने की जानकारी नहीं है। नोटिस मिलने उसका विधि संगत जवाब दाखिल किया जाएगा।