मऊ। जिले में परिषदीय जूनियर हाईस्कूल खुलने में चार दिन बचे हैं, लेकिन अभी अधिकांश स्कूलों में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। 13 की बजाय आठ लाख ही किताबें पहुंचने से शिक्षक भी असमंजस में हैं। उधर, विद्यालय पहुंच कर किताबें मांग रहे अभिभावकों के तेवर देख शिक्षक भी सहम जा रहे हैं।
जिले के 1060 प्राथमिक विद्यालयों तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1.56 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। संक्रमण के चलते शिक्षक मुहल्ला क्लास संचालित कर रहे हैं। अब शासन के फरमान पर 23 अगस्त से परिषदीय जूनियर हाईस्कूूल तथा एक सितंबर से परिषदीय प्राथमिक विद्यालय खुलेंगे। विद्यालय खुलने में चंद दिन ही शेष हैं, विद्यालयों पर शत प्रतिशत नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें नहीं पहुंचने से जहां बच्चे परेशान हैं। वहीं अभिभावक स्कूल पहुंच कर शिक्षकों पर किताबों के लिए दबाव बना रहे हैें। जिले के अधिकांश विद्यालयों पर सातवीं तथा आठवीं कक्षा की पुस्तकें नहीं पहुंच सकी है। कई विद्यालयों पर छठवीं तथा सातवीं कक्षा की गणित, विज्ञान, गृहशिल्प, कृषि विज्ञान की किताबें नहीं बंट सकी हैं। निदेशालय से लगभग 13 लाख पाठ्य पुस्तकें आनी है। अभी तक आठ लाख पुस्तकों की खेप ही सकी है। सूत्रों की मानें तो शासन स्तर से पुस्तकों का क्रय आदेश काफी देर से मांगा गया। इसके चलते समस्या आ रही है। विद्यालय खोले जाने के फरमान के बाद अभिभावक विद्यालय पहुंचकर बच्चों के लिए पुस्तकों की मांग कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि समय से किताबें न मिल पाने से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।
नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों की खेप लगातार आ रही है। अब तक आठ लाख पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं। सत्यापन करने के बाद इन्हें बीआरसी भेजा जा रहा है। -रवि प्रकाश, नोडल अधिकारी