मऊ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब सभी राजस्व गांवों में ठोस एवं गीले कचरों के प्रबंधज का इंतजाम किया जाएगा। ठोस कचरे के लिए कंपास्ट पिट अथवा गढ़्ढे बनाए जाएंगे जबकि तरल पदार्थों के लिए सोख्ता बनवाए जाएंगे। गांव की सामूहिक नालियों को पोखरों बावलियों तक पहुंचाने के लिए नालियां बनाई जाएंगी। कचरे को कंपोस्ट गढ्ढों तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टरों अथवा जेसीबी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए अभियान चलाकर दस दिनों में कार्य पूरा किया जाएगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण कली मिशन निदेशक किंजल सिंह ने जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा है कि मानसून आने वाला है। इसके पूर्व कोविड प्रोटोकाल के नियमों के तहत गांवों में विशेष स्वच्छाता अभियान चलाकर साफ सफाई की जानी है। इसके तहत अब जिले के सभी राजस्व गांवों में ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए कंपोस्ट गढ्ढे और पिट बनाया जाना है। यह ठोस कचरा कंपोस्ट गढ्ढों में एकत्र किया जाएगा और तरल कचरे के लिए सोख्ते बनाए जाएंगे। गांव कली सामूहिक नालियों से निकलने वाले तरल कचरे को गांव में स्थित पोखरों , बावलियों तक पहुंचाने के लिए नालियां खुदवाई जाएंगी। मिशन निदेशक ने लिखा है कि चूंकि अब बरसात आने में काफली कम समय रह गया है और गांवों में सिर्फ एक एक सफाई कर्मी हैं। इसलिए नालियों की खुदाई जेसीबी मशीन से कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इस विशेष स्वच्छता अभियान कली शुरूआत नौ जून से कर दी गई और 18 जून तक इसे पूरा कर दिया जाना है। निदेशक ने लिखा है कि गांवों में ठोस कचरे और पशुओं के कचरे को कंपोस्ट गढ्ढों अथवा पिटों में एकत्र करना है। इससे जैविक खाद बनाई जाएगी। इसी प्रकार गांव की सामूहिक नाली को साफ करके नजदीकी पोखरी अथवा बावड़ी तक नाली की खुदाई कराई जाएगी। जिससे गांव में गंदा पानी अथवा नाबदान का पानी एकत्र न होने पाए। इससे गांव में सफाई भी होगी और कचरे का प्रबंधन भी हो जाएगा। गांव में जो कचरा एकत्र किए गए हैं उन्हें जेसीबी की सहायता से कंपोस्ट गढ्ढों में डाला जाएगा। इस बाबत जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर का कहना है कि इस संबंध में सभी खंड विकास अधिकारियों और एडीओ पंचायत को निर्देश दे दिए गए हैं। 18 जून तक इसे हर हाल में पूर्ण कर लिया जाना है।