मऊ। हत्या के मामले में बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट-1 अशोक कुमार ने हत्या और हत्या के प्रयास के मामले में नामजद अभियुक्त को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ कुल 50 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। जज ने फैसला सुनाते समय अपने आदेश मे लिखा कि वास्तव में इंसान से इंसान के बीच जो जुगुप्सा, मनुष्य से मनुष्यता का लोप तथा मानवीय रिश्ते का निरंतर तार तार होना है। उन्होंने आगे लिखा कि इस काल खंड की सबसे बड़ी त्रासदी है। अभियुक्त ने अमानवीय कृत्य करते हुए दोनों घायलों को चोटें पहुंचाईं, तथा वादी मुकदमा के पिता जगदीश सिंह को भाले से घोप कर हत्या कर दी। ऐसे जघन्य कृत्य के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण अपनाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। मामला रानीपुर थाना क्षेत्र का है, आरोपी को जज ने आजीवन कारावास की सजा के साथ ही कुल 50 हजार रुपए अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जहां अर्थदंड जमा हो जाने पर 75 प्रतिशत धनराशि वादी मुकदमा को देने का आदेश जज ने सुनाया। पुलिस ने मामले की जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट जमा किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए प्रभारी डीजीसी फौजदारी अजय कुमार सिंह ने 10 गवाहों को कोर्ट में पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। दूसरी तरफ बचावपक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी संतोष सिंह को हत्या और हत्या के प्रयास का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद उसे हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 40 हजार रुपए अर्थदंड लगाया। वही हत्या के प्रयास के मामले में 10 वर्ष की सजा के साथ ही 10 हजार रुपए अर्थदंड लगाया।
यह है मामला
रानीपुर थाना क्षेत्र के काझा गांव निवासी वीरेंद्र बहादुर सिंह पुत्र स्व. जगदीश सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई। जिसमें गांव के ही संतोष सिंह को आरोपी बनाया गया। वादी का आरोप था कि 8 जून 2017 की रात्रि 8:30 बजे उसके पिता जगदीश सिंह को आरोपी ने भाला से घोंप कर घायल कर दिया। उन्हें बचाने वादी वीरेंद्र बहादुर सिंह और उसकी बहन ऊषा गई तो आरोपी ने उन्हें भी भाले से वार कर मारने की कोशिश की। इलाज को ले जाते समय जगदीश सिंह की मौत हो गई।