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कोतवाल मुहम्मदाबाद गोहना व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब

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मऊ। न्यायिक मजिस्ट्रेट अलका नेहल ने कोर्ट के आदेश का पालन कर आख्या कोर्ट में प्रेषित न किए जाने के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहाना को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उन्हें 20 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर आख्या देने का आदेश दिया है। मामला कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र का है।
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मामले के अनुसार राम सोच चौहान ने न्यायालय में धारा 155(2 ) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें एनसीआर 10 /2017 धारा 323, 504 भादवि थाना मुहम्मदाबाद गोहना की विवेचना कराए जाने के लिए का आदेश दिए जाने का अनुरोध किया था। सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने विधिनुसार विवेचना करने का निर्देश प्रभारी निरीक्षक को दिया था।
आदेश के बाद ढाई वर्ष से अधिक समय व्यतीत होने के बाद पुलिस की ओर से मामले मे कोई कार्यवाही न होने पर राम सोच ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। तथा आदेश के बावजूद भी अब तक उक्त एनसीआर की विवेचना कर न्यायालय में कोई आख्या प्रस्तुत न किए जाने पर मामले मे प्रगति रिपोर्ट तलब करने का अनुरोध किया। कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक से आख्या मांगी गई थी तो अवगत कराया गया कि विवेचना प्रचलित है, लेकिन कोई आख्या न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में लिखा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि जानबूझकर न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है, और उपेक्षा बरती जा रही है। उन्होंने प्रकरण में विलंब के कारण सहित प्रभारी निरीक्षक मुहम्मदाबाद गोहना को व्यक्तिगत रुप से कोर्ट में उपस्थित होकर आख्या देने का निर्देश दिया। साथ ही पत्रावली में सुनवाई के लिए 20 नवंबर की तिथि नियत किया।
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