मऊ। कोरोना तथा चुनावी कार्यों में सरकारी शिक्षकों की ड्यूटी लगने से ऑनलाइन पढ़ाई पर असर पड़ने लगा है। शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी न लगाए जाने को लेकर शिक्षकों ने संगठन के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यो में लगाए जाने से ऑनलाइन पढ़ाई कराने का दावा कागजों तक ही सिमटकर रह गया है। वहीं शिक्षकों का कहना है कि कोरोना तथा चुनाव में हमारी ड्यूटी न लगे तो शिक्षक बेहतर समय देकर गुणवत्तापरक शिक्षण कार्य कर सकते हैं।
जिले में 1600 परिषदीय विद्यालयों तथा सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में लगभग दो लाख से अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं। परिषदीय विद्यालय तथा माध्यमिक विद्यालयों में संसाधन के अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई अब सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है। कुछ हद तक तो प्राइवेट विद्यालय ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे लेकिन अधिकांश सरकारी विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई जैैसे तैसे चल रही है। इसका कारण कोविड में लगे शिक्षकों की ड्यूटी है। अब चुनाव भी नजदीक आ गया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके कारण पूरी शिक्षा प्रभावित हो सकती है। वहीं शासन से निर्देश है कि ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाए ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। 22 जनवरी तक स्कूलों को बंद करने का आदेश है। ऐसे में बच्चे घर रहकर पढ़ाई से कोसो दूर है। इसे लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष कृष्णानंद राय का कहना है कि शिक्षकों की ड्यूटी कोविड में लगाई गई है। अब चुनाव में भी लगाई जाएगी। शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यो में लगाए जाने से शिक्षण कार्य पर असर पड़ता है। ऐसे में शिक्षक बच्चों को कैसे ऑनलाइन पढ़ाएगा। इसे जिम्मेदार को संज्ञान में लेने की जरूरत है। वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शैलेश कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्यो में ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षण कार्य पर असर पड़ रहा है। शिक्षकों की कोविड तथा चुनाव ड्यूटी लगाई जाएगी तो शैक्षणिक कार्य पर असर पड़ेगा।