नगर क्षेत्र में धू-धू कर जलती होलिका। संवाद
मऊ। जिले में बृहस्पतिवार की रात 1246 स्थानों पर परंपरागत तरीके से होलिका दहन किया गया। आग लगाते ही होलिका धधक उठी। इससे पूर्व लोगों ने विधिवत होलिका का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान जिला प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जबकि चौराहों और गली नुक्कड़ों पर हुड़दंगियों की टोली हुड़दंग में मस्त रही। होली की पूर्व संध्या पर निर्धारित समय पर जिले में 1246 स्थानों पर परंपरागत तरीके से हालिका दहन किया गया। होलिका दहन देर तक चलता रहा। बच्चों से लेकर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं होली की मस्ती में दिखे। देर रात तक लोग हालिका दहन में मशगूल रहे। इसी तरह ग्रामीण इलाकों मेें भी होलिका दहन परंपरागत रूप से हुआ। लोगों ने होलिका की पूजा अर्चना कर उसमें आग लगाई ओर होलिका धू-धू कर जल उठी। इसे पूर्व सुबह लोगों ने कपड़ों, रंगो और खाने पीने के तमाम सामानों की खरीदारी की। पूरे दिन शहर, कस्बों , बाजारों सहित सभी चट्टी चौराहों पर खासी चहल पहल देखी गई। सामानों के दामों में भारी बढ़ोत्तरी के बावजूद खरीदारों की संख्या में कोई कमी नहीं रही। रंग, अबीर गुलाल भी काफी महंगा था। इनमें सुगंध युक्त गुलाल के खरीदार ज्यादा दिखे। हालांकि लोगों ने पैकेट बंद अबीर गुलालों की खरीदारी को अधिक महत्व दिया।
उधर, घरों में महिलाएं तरह-तरह के मिष्ठान, पकवान, नमकीन, गुझिया और पापड़ आदि बनाने में जुटी हुई रहीं। बच्चे सुबह से ही गुब्बारों में पानी और रंग भरकर आते-जाते लोगों पर फेंकते रहे। शराब की बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद लोगों को शराब के नशे में मदहोश होली के फूहड़ गीतों को गाते झूमते एक दूसरे को रंग पोतते रहे। होली को लेकर बृहस्पतिवार को खोवे के भाव में तेजी रही। शहर की अच्छी दुकानों पर तो खोवा उपलब्ध ही नहीं था। गाजीपुर, औड़िहार और वाराणसी से आए व्यापारी खोवा 300 से 350 रुपये प्रति किग्रा बेच रहे थे। फिर भी शाम को किसी भी भाव पर खोवा बाजार में उपलब्ध नहीं था। बहुत से लोगों को खोवे के लिए इधर उधर भटकते देखा गया।