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Mau News: हत्या के मामले में दोषी पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका सहित तीन को उम्रकैद, जुर्माना भी लगा

Wed, 13 May 2026 10:35 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मऊ।

सार

मऊ जिले में हत्या के मामले में दोषी पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका सहित तीन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं रमेश पर 25 हजार रुपये, सुदर्शन पर 40 हजार और बृजेश पर कुल 88 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
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रमेश सिंह काका - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-1 बाकर शमीम रिजवी ने 23 वर्ष पूर्व मोहल्ला भीटी में रामकिशुन मल्लाह की हत्या और हत्या के षड्यंत्र के मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका सहित 12 लोगों के विरुद्ध सुनवाई पूरी की। दोषी पाने पर रमेश सिंह काका, सुदर्शन सिंह और और बृजेश सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही रमेश पर 25 हजार रुपये, सुदर्शन पर 40 हजार और बृजेश पर कुल 88 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया। वहीं पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
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चार आरोपियों की मौत हो जाने के कारण उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला भीटी का है। शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला भीटी निवासी शांति देवी पत्नी राम प्रसाद मल्लाह की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

क्या है पूरा मामला
वादिनी के अनुसार, छह मार्च 2003 की सुबह पूजा करने के बाद उनका पुत्र रामकिशुन मल्लाह सुबह करीब 8:30 बजे बाइक से घर से निकला था। उसी दौरान भीटी मोहल्ला निवासी सुदर्शन सिंह के घर के पास रंजिशन धनंजय सिंह निवासी निजामुद्दीनपुरा, बृजेश सिंह निवासी सरवां थाना सरायलखंसी, सुदर्शन सिंह सहित अन्य लोगों ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
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पुलिस ने विवेचना के बाद परदहां ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख रमेश सिंह काका, बृजेश सिंह, अजय सिंह, रमापति राजभर, धनंजय सिंह, रामू राजभर, सुदर्शन सिंह, मनीष सिंह, पीयूष कांत चौबे, रविकांत चौबे, सिद्धार्थ कुमार सिंह उर्फ रानू सिंह और छोटे सिंह उर्फ राघवेंद्र सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी फौजदारी ने 15 गवाह प्रस्तुत कर पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने आरोपियों को झूठा फंसाए जाने की दलील दी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने बृजेश सिंह को हत्या, हत्या के षड्यंत्र, मारपीट और आयुध अधिनियम के मामले में दोषी पाया। वहीं रमेश सिंह को हत्या के षड्यंत्र में दोषी करार दिया गया। सुदर्शन सिंह को हत्या के षड्यंत्र और आरोपियों को शरण देने के मामले में दोषी पाया गया।
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सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने बृजेश सिंह को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड, हत्या के षड्यंत्र में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड, मारपीट के मामले में एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड तथा आयुध अधिनियम में तीन वर्ष के कारावास और आठ हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

अर्थदंड जमा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं रमेश सिंह और सुदर्शन सिंह को हत्या के षड्यंत्र के मामले में आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। साथ ही सुदर्शन सिंह को आरोपियों को शरण देने के मामले में पांच वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। अर्थदंड जमा न करने पर चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड जमा होने पर 75 प्रतिशत धनराशि मृतक रामकिशुन की माता एवं वादिनी को दी जाएगी। साथ ही रामू राजभर, मनीष सिंह, पीयूषकांत चौबे, रविकांत चौबे और सिद्धार्थ कुमार सिंह उर्फ रानू सिंह को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं अभियुक्त धनंजय सिंह, छोटे सिंह उर्फ राघवेंद्र सिंह, अजय सिंह और रमापति राजभर की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।
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