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Mau News: शरीर की मिठास बना रही आंखों को बीमार, किडनी फेल होने में शुगर अहम कारण

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कसारा मेडिकल कालेज में मरीज का चेकअप करते नेत्र रोग विशेषज्ञ डा.लालमुनी सिंह
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जिले में शरीर में शुगर की मात्रा आंखों को नुकसान पहुंचा रही है। बीते पांच माह में ही जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ने से डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी के मरीजों का ग्राफ बढ़ गया है।
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हर दिन एक से दो मरीजों में इसकी प्रारंभिक शुरुआत तो किसी में यह गंभीर स्थिति में आ रही है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 35 फीसदी मरीज शुगर की बीमारी के चलते पहुंच रहे हैं।
वहीं, इन दोनों जगहों पर बने डायलिसिस सेंटर में आने वाले मरीजों में 40 फीसदी मरीज भी शुगर के चलते किडनी फेलियर की श्रेणी में हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एमके पांडेय ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी में रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है।
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बताया कि ओपीडी में हफ्ते भर में 10 से अधिक मरीज शिकायत लेकर आ रहे हैं। पहले यह संख्या तीन से चार थी। वहीं, मेडिकल कॉलेज के डॉ. लालमुनी ने बताया कि शुगर के चलते किडनी फेलियर के साथ डायबिटिक रेटिनोपैथी के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बताया कि मरीजों की काउंसिलिंग के दौरान पाया गया है कि मधुमेह के लंबे समय तक रहने और इस पर नियंत्रण न होने पर बीमारी के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
शुगर का स्तर लगातार अनियंत्रित होने से मरीज इस बीमारी की जद में आ रहे हैं। बताया कि शुरुआत के दो स्टेजों में अच्छी जीवनशैली अपनाकर इसे ठीक किया जा सकता है। समय पर इलाज नहीं होने पर आंखों की रोशनी जाने का खतरा बना रहता है।
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डायलिसिस कराने वालों में भी शुगर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही
जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में बने डायलिसिस सेंटर में डायलिसिस कराने वाले मरीजों में करीब 40 फीसदी मरीज शुगर के हैं। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि डायलिसिस कराने वाले मरीजों में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने का मुख्य कारण लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर का रहना है। शुगर से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं (नेफ्रॉन्स) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे खून छनना बंद हो जाता है और मरीज ''''डायबिटिक नेफ्रोपैथी'''' का शिकार होकर डायलिसिस की स्थिति तक पहुंच जाते हैं। साथ ही डायबिटीज के मरीजों में बीपी की समस्या आम है, जो किडनी के डैमेज होने की रफ्तार को कई गुना बढ़ा देती है।
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डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण
दृष्टि में धब्बे या काले धागे तैरते रहते हैं।
रात में देखने में कठिनाई होती है।
आसानी से रंगों की पहचान में दिक्कत होती है।
चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव आता है।

बचाव के उपाय
दृष्टि में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें।
अपने रक्त शर्करा स्तर की निगरानी करें।
रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखें।
नियमित व्यायाम करने की आदत डालें।
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