ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार के लिए भले ही सरकार ने सीएचसी-पीएचसी जैसे सरकारी अस्पताल बनवाए हैं, बावजूद इसका लाभ आमजन को मिलता नहीं दिख रहा है। इसके पीछे तैनात चिकित्सकों का मनमाना रवैया तथा जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों द्वारा मानीटरिंग न किया जाना है। शनिवार को अमर उजाला ने बड़राव सीएचसी की पड़ताल की। यहां सात चिकित्सकों में सुबह 11 बजे तक केवल चार ही चिकित्सक अपने चेंबर में मरीजों का उपचार करते दिखे। हैरानी वाली बात यह है कि यहां खुद सीएचसी अधीक्षक अपने कक्ष से गायब दिखे।
शनिवार की सुबह 10 बजे अमर उजाला की टीम बड़राव सीएचसी पहुंची। यहां केंद्र अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार अपने कक्ष में नहीं मिले। वहीं मौके पर डॉ. अभिषेक गुप्ता अपने चेंबर में मरीजों का उपचार करते मिले। वहीं डॉ. पीएन सिंह, डॉ. प्रदीप मौर्या तथा डाक्टर तनवीर मरीजों का उपचार करते मिले। वहीं महिला चिकित्सक तथा दो अन्य डाक्टर अपने चेंबर से गायब मिले। इस दौरान महिला चिकित्सक के न होने से महिला मरीज इलाज को लेकर परेशान रहीं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. एसएन दुबे का कहना है कि सभी चिकित्सकों को ओपीडी में समय पर उपस्थित रहने का सख्त निर्देश है, बावजूद अगर कोई विलंब से पहुंचता है तो कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में केंद्र अधीक्षक से जानकारी ली जाएगी।