भाई प्रमोद चौबे बीते एक सितंबर को हकारीपुर गांव पहुंचे एक डॉक्टर को घर बुलाकर ही उपचार कराया गया। इस बीच डॉक्टर ने सलाह दी कि उनको किसी अस्पताल में भर्ती कराया जाए। एंबुलेंस बुलाने की बात हुई, तभी किसी ने बताया कि घर तक एंबुलेंस नहीं आ सकती है।
गांव के लोगों ने बताया कि यह समस्या पुरानी है। जिसके बाद प्रमोद चौबे ने गांव के सभी लोगों की समस्या का निजात करते हुए करीब दो सौ मीटर कच्चे मार्ग को जेसीबी लगाकर सही कराया। बहन को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, हालाकि पूनम दूबे की मंगलवार की शाम करीब पांच बजे उपचार के दौरान मौत हो गई।
मृतका की कुल आठ बेटियां हैं। बुधवार को अंतिम यात्रा निकलने पर सभी आठ बेटियों ने मां के शव को कंधा दिया। जिसके बाद शव का काशी के मर्णिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।