दुबारी। मधुबन तहसील क्षेत्र के उत्तरी दिशा में स्थित धर्मपुर बिशुनपुर के बिंदटोलिया गांव के पास कटान तेज होने से गांव का अस्तित्व मिटने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। गांववासी अपने दशकों पूर्व बनाए गए आशियाने को जब तोड़ रहे हैं तो उनका कलेजा कांप जा रहा था। सोमवार को 21 ग्रामीणों ने अपना मकान तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर रवाना हो गए। लेकिन शासन प्रशासन की तरफ से कटान पीड़ितों की सुधि नहीं ली जा सकी है।
सरयू नदी के लगातार मधुबन के देवारा में कहर बरपाने से कटान पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। क्षेत्र के धर्मपुर बिशुनपुर, दुबारी, मोलनापुर के लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में कटान प्रतिदिन हो रही है। नदी के रौद्र रुप धारण करने से प्रतिदिन उपजाऊ जमीन तथा घर नदी में समा जा रहे हैं।
सोमवार को ग्रामीण जब अपने आशियाने को तोड़ रहे थे तो उनकी आंखें नम हो रहीं थी। दुबारी के खैरा पुरवा में कटान की रफ्तार तेज हो गई है। नदी के रौद्र रुप देख लोग अपने मकानों को खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने लगे हैं। बिंदटोलिया गांव के 21 लोगों ने अपने आशियाने को तोड़कर ट्राली पर लादकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे थे। कटान पीड़ित अपने सभी सामानों को प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय नकिहवा ,धर्मपुर बिशुनपुर में रख रहे हैं। सभी कटान पीड़ित नौ विद्यालय में रह रहे हैं।
कटान पीड़ित कोई मकान तोड़ रहा था तो कोई हैंडपंप उखाड़ रहा था। कोई ट्राली से ईंट और अन्य समान लोड कर रहा था। पूरा बिंटोलिया गांव में दहशत का माहौल है। कटान पीड़ितों का कम मकान बनेगा कोई ठिकाना नहीं है। तीन वर्ष में लगभग 150 कटान पीड़ित बेघर हुए हैं, लेकिन प्रशासन के तरफ से अब तक मात्र 30 ही कटान पीड़ितों को सिर्फ जमीन पट्टा हुआ है शेष अभी सरकारी विद्यालय एवं खुले आसमान में जीवन यापन करने को विवश हैं।
इस संबंध में केशव, मोती लाल, सीताराम, कोदई, चंदन, सीताराम, विक्रम, दीपचंद, जयश्री, अनिल, पप्पू, जयप्रकाश, सचिन, रामजी, भोला, पूरन, पंकज, रमेश, सादानंद, रामलखन, सुरेश का कहना है कि बना बनाया मकान तोड़ना पड़ा है। अब तक शासन से एक पाई की मदद नहीं मिल सकी है। नदी के कहर बरपाने का सिलसिला चलता रहा तो बिंदटोलिया का अस्तित्व कभी भी मिट सकता है।