मऊ। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष बने भीम राजभर का कोई बड़ा राजनैतिक बैकग्राउंड नहीं रहा है। पिता के साथ नागपुर और छत्तीसगढ़ में रहने के दौरान उन्होंने स्नातक की शिक्षा पूरी करते ही बसपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी । वर्ष 1990 में मऊ आने के बाद पार्टी ने इंदारा सेक्टर बूथ अध्यक्ष बना कर इन्हें पहली जिम्मेदारी दी थी। तब से आज तक वे पार्टी की अपेक्षाओं पर खरे उतरते आ रहे हैं।
मूलरूप से मऊ जिले के कोपागंज क्षेत्र के बाबूपुर साहूपुर गांव निवासी भीम राजभर ने वर्ष 1985 में स्नातक करने के बाद छत्तीसगढ़ में बसपा का दामन थाम लिया था। उनके पिता रामबलि राजभर कोल माइंस में सिक्योरिटी इंस्पेक्टर थे। भीम अपने माता पिता की एकलौती संतान है। बसपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने एमए और एलएलबी की। 1990 में पिता के सेवानिवृत्त होने पर भीम पैतृक घर आ गए। पार्टी ने उन्हें पहली बार इंदारा सेक्टर के बूथ का अध्यक्ष बनाया। बेहतर कार्य करने पर उन्हें वर्ष 2001 में मऊ जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई। वे वर्ष 2006 तक बसपा के जिलाध्यक्ष रहे।
वर्ष 2012 में बसपा ने भीम राजभर को सदर सीट से प्रत्याशी बनाया, कांटे के मुकाबले में वे कौमी एकता दल के प्रत्याशी मुख्तार अंसारी से मात्र चार हजार वोटों से चुनाव हार जरूर गए किंतु पार्टी का भरोसा उन पर बना रहा। बसपा ने उन्हें मंडल प्रभारी मनोनीत किया। वर्ष 2017 में उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य का प्रदेश कोआर्डिनेटर बनाया।
13 दिसंबर 2018 को भीम का कार्य क्षेत्र बदला इस बार उन्हें बिहार राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। भीम राजभर बताते हैं कि 16 दिसंबर 2018 से अबतक वे बिहार में रहकर पार्टी का काम करते रहे। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी, उन्हें यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। नई जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने कहा कि वे शुरू से पार्टी का कार्य पूरी कर्तव्य निष्ठा से करते आ रहे हैं, आगे भी उसी निष्ठा से काम कर राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती के निर्देशन में काम कर पार्टी को बुलंदियों तक ले जाने का काम करेंगे।