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मशरूम की खेती कर किसान बढ़ाएं अपनी आय

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रतनपुरा (मऊ)। आत्मा योजना के अंतर्गत स्थानीय विकास खंड के सभागार में सोमवार को रवि गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोेंष्ठी में मशरूम की खेती के बारे में विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने किसानों को जानकारी दी। गोष्ठी में डा. अजीत कुमार वत्स ने किसानों को बताया कि ऑयस्टर मशरूम की खेती बड़ी आसान और सस्ती है। इसमें दूसरे मशरूम की तुलना में औषधीय गुण भी अधिक होते हैं। दिल्ली, कलकत्ता, मुम्बई एवं चेन्नई जैसे महानगरों में इसकी बड़ी मांग है। जिससे विगत तीन वर्षों में इसके उत्पादन में 10 गुना वृद्धि हुई है।
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उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश मशरूम उत्पादन का हब बन रहा है। कई प्रदेशों से प्रशिक्षण लेने के लिए यहां किसान आते रहते हैं। ऑयस्टरस्पॉन (बीज) के जरिए मशरूम की खेती की जाती है, इसके लिए सात दिन पहले ही मशरूम के स्पॉन (बीज) लें। इस लेकर काफी दिन रखने पर बीज खराब होने लगते हैं। इसके उत्पादन के लिए भूसा, पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन और स्पॉन (बीज) की जरूरत होती है। दस किलो भूसे के लिए एक किलो स्पॉन की जरूरत होती है, इसके लिए पॉलीबैग, कार्बेंडाजिम, फॉर्मेलिन, की जरूरत होती है। इस दौरान डॉ. राम कृष्णराम, सुशील गिरी, प्राविधिक सहायक अखिलेश विश्कर्मा, प्रशांत कुमार प्रजापति, बृजमोहन सिंह , राघवेंद्र , राजन कुमार, नितेंद्र सिंह, विनोद वर्मा, विपिन कुमार यादव आदि मौजूद रहे।
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