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अभिभावकों और शिक्षकों के लिए बेहद चुनौती बन रहा है बच्चों की मनोदशा को बदलना

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मऊ। संक्रमण के बाद आफलाइन क्लास शुरू हो गई है। लेकिन लंबे समय तक विद्यालयों के बंद रहने से स्कूली बच्चों के दिल और दिमाग पर दो साल तक संक्रमणकाल का गहरा असर रहा। बच्चों की इस मनोदशा को बदलना अभिभावकों से लेकर शिक्षकों तक के लिए चुनौती बन रहा है। इससे उबारने के लिए कई स्कूलों ने योग और खेल गतिविधियां को बढ़ावा दिया है। बच्चों में ऑफलाइन कक्षाओं के प्रति उत्साह तो दिख रहा लेकिन पहले की अपेक्षा एकाग्रता गायब है। अधिकतर बच्चे अभी भी अपना ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। उन पर शिक्षकों को अधिक ध्यान देना पड़ रहा है। बेसिक शिक्षा से संबद्ध परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक कमजोर छात्रों की पहचान कर विशेष कक्षा चलाकर उनकी मनोदशा को पढ़कर पढ़ाई करा रहे है।साथ ही खेल के साथ ही मनोरंजन के तरीकों से उनकी मनोदशा को एकाग्र करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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जिले में 2000 से अधिक विद्यालय हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय तक विद्यालयों के बंद रहने के चलते पठन पाठन पर विपरीत असर पड़ा है। कोरोना महामारी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और मन:स्थिति को बदल दिया है। स्कूल बंद होने से लेकर खेल गतिविधियों पर लगी रोक के कारण घर से बाहर कम निकलने से बच्चों की दिनचर्या में बदलाव आ गया है। इन बदलाव ने बच्चों की शारीरिक और मानसिक हालत को झकझोरा है। कोरोना संक्रमण की सामान्य स्थिति के बाद विद्यालयों में आफलाइन कक्षाएं चलने लगी हैं।
शिक्षकों के अनुसार दो साल पहले की तुलना में छात्र छात्राओं मेें क्लास के दौरान एकाग्रता देखने को नहीं मिल रही है। शिक्षकों को पढ़ाने के दौरान दुगुनी मेहनत करनी पड़ रही है। शिक्षक अरुण कुमार मिश्र ने बताया कि कोविड के बाद पाठ्यक्रम का रिवीजन कराया गया है। योग और खेल गतिविधियां को बढ़ावा दिया जा रहा है। बच्चों की मनोदशा काफी बदल गई है। शिक्षक जितेंद्र पाठक ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के चलते बच्चों की मनोदशा में काफी बदलाव आया है। जो होनहार बच्चा था, उसने तो किसी तरह अपने को पढ़ाई के लिए तैयार कर लिया लेकिन जो कमजोर बच्चा था, वो काफी पीछे रह गया। उनके लिए कड़ी मेहनत की जा रही है। छात्र वैभव ने बताया कि दो साल के दौर में मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्त रहे। घर पर ऑनलाइन पढ़ाई के समय अभिभावक साथ ही बैठे रहते थे लेकिन इसके बाद भी ऑनलाइन पढ़ाई समझ नहीं आई। अब पढ़ाई के दौरान लगता है कि हम पढ़ाई में काफी पीछे रह गए हैं। छात्रा अभिनव ने कहा कि अब स्कूल में आकर लगता है कि पढ़ाई अच्छी हुई होती तो स्थिति बेहतर हो सकती थी। स्कूल में शिक्षक मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अभी कुछ और समय लगेगा। अभिभावक सिद्धिीदात्री ने बताया कि कोरोना काल में आनलाइन पढ़ाई में व्यवधान आ रहा था। ऑनलाइन में बच्चा पूरी तरह ध्यान नहीं दे पा रहा था, लेकिन ऑफलाइन कक्षाओं के चलने के बाद मनोदशा में काफी बदलाव आया है। अभिभावक धनंजय त्रिपाठी ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ नाम की रही। ऑफलाइन पढ़ाई जबसे शुरू हुई है तो बच्चों को अपने स्तर का पता चला है कि वो कितने में हैं। स्कूल में शिक्षक तो घर में अभिभावक उन पर नजर रखे हैं। स्थिति में सुधार आने लगा है।
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