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सरकार की दोमुही पालिसी का हिस्सा है शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था

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मऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर एसोसिएशन के तत्वाधान में जिले के माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों अपनी
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विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन सौंपा। धरने को संबोधित करते हुए प्रदेशीय संरक्षक अशोक कुमार राय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा हम आर्थिक रूप से पिछड़े कर्मचारियों की समस्याओं तथा हमारी जायज मांगों को न माना जाना सरकार की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है। एक तरफ राज्य कर्मचारियों को सारी सुविधाएं मिल रही हैं दूसरी ओर हमें सरकार से बार-बार मांग करने के बाद भी प्राप्त नहीं हो रही है।
प्रदेशीय उपाध्यक्ष कमल नरायन सिंह ने कहा कि एक ही राज्य में राज्य कर्मचारियों को अलग व्यवस्था तथा हम कर्मचारियों को अलग व्यवस्था सरकार की दोमुही पालिसी का हिस्सा है, इसे हमे बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रदेशीय मंत्री बलवंत पांडेय ने कविता के माध्यम से शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समस्याओं पर प्रकाश डाला। मुश्ताक अहमद ने नई पेंशन नीति से संबन्धी कर्मचारियों से जुड़ी समस्त अनियमितताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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जिला मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की जायज मांगें जो अरसे से शासन के संज्ञान में हैं तथा समय-समय पर सैद्धांतिक सहमति शासन से बनने के उपरांत भी सरकार की उदासीनता के कारण हम कर्मचारियों को आज सामूहिक अवकाश लेकर धरना देने को मजबूर किया जा रहा है। धरने को जिलाध्यक्ष संजय कुमार उपाध्याय, रमावती, बृजमोहन यादव (कोषाध्यक्ष), राजीव राय, अजीत यादव, संजीव कुमार सिंह, इरफान अहमद, कपूरचंद पांडेय, जमाल अख्तर, राजीव द्विवेदी, विश्राम सिंह, जमशेद अहमद, संदीप मिश्र, शकील अहमद, अखिलेश कुमार आदि ने संबोधित किया।
शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की प्रमुख मांग
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--अर्ह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की शिक्षक पद पर पदोन्नति की जाए।
-राज्य कर्मचारियों की भांति अवकाश नगदीकरण की सुविधा दी जाए।
- राज्य कर्मचारियों के समान पेंशन दी जाए।
- नई पेंशन नीति से आच्छादित कार्मिकों के वेतन से पैसा कटने के बाद भी संबंधित प्रान नंबर पर नियमित रूप से न जमा किया जाना।
-नियम 22-बी का लाभ पूर्व की भॉति, राज्य कर्मचारियों की भॉति चिकित्सा सुविधा दी जाए।
-नियमित नियुक्ति की व्यवस्था की जाए।
-वित्त विहीन विद्यालयों के कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनवाया जाए।
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