मऊ। शिक्षा सत्र के सात माह बीत जाने के बाद भी जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई है। इसके चलते पढ़ाई प्रभावित हो रही है। 40 प्रधानाचार्यों के पद रिक्त चल रहे हैं। हालत यह है कि 1164 के सापेक्ष लगभग 678 शिक्षकों की ही तैनाती की जा सकी है। हाल में ही शासन की तरफ से शिक्षकों की भर्ती की गई है, जो ऊंट के मुुंह मेें जीरा साबित हो रही है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। आला अधिकारी शासन की तरफ से नियुक्ति प्रक्रिया जारी रहने की बात कहकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।
जिले में 67 सहायता प्राप्त सहित 436 मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 2.53 लाख छात्र छात्राएं अध्यनरत हैं। शिक्षा सत्र का सात माह बीत चुका है, लेकिन सहायक अध्यापकों तथा प्रवक्ता का पद रिक्त रहने से छात्र छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों को कोर्स पूरा होने को लेकर चिंता सताने लगी है। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के 843 पदों के सापेक्ष 471 शिक्षक कार्यरत हैं। 372 पद रिक्त चल रहे हैं। इसी क्रम में प्रवक्ता के सृजित 321 के सापेक्ष 207 कार्यरत हैं। 114 प्रवक्ता के पद रिक्त चल रहे हैं। प्रधानाचार्यो के 67 के सापेक्ष 27 की ही तैनाती है। प्रधानाचार्यो के 40 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रभारी प्रधानाचार्यो के भरोसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
शासन की तरफ से जिले के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 105 पद सहायक अध्यापकों तथा 45 प्रवक्ता पद पर भर्ती की गई है, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।अभिभावकों की मानें तो शिकायत के बाद भी आला अधिकारियों की ओर से आश्वासन देकर मामले को लटका दिया जा रहा है। रिक्त चल रहे शिक्षकों के पद पर कब तक तैनाती प्रक्रिया कब तक पूरी हो जाएगी आला अधिकारी बताने को तैयार नहीं हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेंद्र प्रसार ने बताया कि 105 सहायक अध्यापकों तथा 45 प्रवक्ता पदों के लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया 18 नवंबर से शुरू होगी। शासन स्तर से शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही पूरी होने की उम्मीद है।