मऊ। जिले के विभिन्न ब्लॉकों के परिषदीय विद्यालयों में वर्षों बाद भी चाहरदीवारी नहीं बन सकी है। इसके चलते विद्यालय परिसर में छुट्टा पशुओं का जमघट लगने से गंदगी का अंबार लगा रहता है। अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। हालत यह है कि 355 परिषदीय विद्यालयों में चहारदीवारी सहित कई सुविधाओं की दरकार है।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। परिषदीय विद्यालयों को निजी विद्यालयों के समकक्ष खड़ा करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प योजना शुरू की गई है। लेकिन योजना शुरू होने के वर्षों बाद भी विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं बन सकी है। चहारदीवारी न होने से विद्यालय कैंपस में छुट्टा पशुओं का जमघट लगा रहता है। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक जहां चिंतित रहते हैं।
चाहरदीवारी विहीन विद्यालयों के ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो दोहरीघाट में 24, फतहपुर मंडाव में 45, कोपागंज 112, परदहां में छह, रानीपुर में 50, मुहम्मदाबादगोहना में 24, बड़रांव में सात सहित 355 परिषदीय विद्यालय शामिल हैं। विद्यालय के अभिभावकों का कहना था कि विद्यालय की चाहरदीवारी न होने से शिक्षण कार्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। बच्चों की सुरक्षा का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विद्यालयों में चाहरदीवारी सहित सभी सुविधाएं बहाल की जाए।
इस मामले में जिला समन्यवयक निर्माण अजीत तिवारी ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प योजना के पैरामीटर में चाहरदीवारी को शामिल कर लिया गया है। फरवरी माह 2022 तक समस्त विद्यालयों में चाहरदीवारी का निर्माण करा दिया जाएगा।