मथुरा। मां यमुना का जन्मोत्सव बृहस्पतिवार को यमुना छठ के रूप में धूमधाम से मनाया गया। घाट स्थित यमुना के मंदिरों में फूल बंगला सजाए गए। मां का अभिषेक और भव्य शृंगार किया गया। दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। शहर में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। यमुना की भव्य झांकी के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
परंपरागत रूप से नवरात्र में छठ पर मां यमुना के भक्तों ने घाट किनारे स्थित मंदिरों में दर्शन पूजा प्रात:काल ही शुरू कर दी थी। समय के साथ ही दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ती गई। लोगों ने यमुना के मंदिर में मां का अभिषेक किया। पुष्प अर्पित करते हुए प्रसादी लगाई। यमुना छठ पर पूजा अर्चना का यह क्रम देर रात तक विभिन्न मंदिरों में जारी रहा।
इधर, माथुर चतुर्वेद परिषद के तत्वाधान में परिषद के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक, अध्यक्ष राकेश राजेंद्र प्रसाद चतुर्वेदी, संरक्षक गिरधारी लाल पाठक व नवीन नगर, महामंत्री राकेश तिवारी एडवोकेट ने संयुक्त रूप से कार्यालय निकट यमुना का पूजन किया। मां यमुना के शुद्धिकरण के लिए संकल्प लिया।
इस मौके मनोज पाठक, संजय एल्पाइन, नीरज चतुर्वेदी ,राजकुमार, अनिल चतुर्वेदी, संजीव चतुर्वेदी, मुंबई शाखा के उपाध्यक्ष अरविंद चतुर्वेदी, दुबई शाखा के संगठन मंत्री मधुरम चतुर्वेदी, आत्मनिर्भर के संस्थापक अध्यक्ष रंजीत चतुर्वेदी पाठक भी शामिल हुए।
सायंकाल विश्राम घाट से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें विभिन्न झांकियां शामिल हुईं, जिसमें गणेश जी, श्रीनाथ जी की झांकी, प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर की झांकी, प्रकाश बैंड, उत्तराखंड का बैंड और ढोल नगाड़े भी शामिल हुए। बाबूलाल की नफरी भी शोभायात्रा का हिस्सा बनी। शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ। देर शाम यमुना जी का फूल बंगला और छप्पन भोग का आयोजन किया गया। भक्तों ने इसके भव्य दर्शन किए।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली मंगल कलश यात्रा
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थली से बृहस्पतिवार को भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो गया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के तत्वावधान में परंपरागत कलशयात्रा निकाली गई। इस दौरान श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में भी मां यमुना की जयजयकार हुई।
सुबह नौ बजे गाजे-बाजे के साथ यमुना पूजन के लिए मंगल कलशयात्रा प्रारंभ हुई। इसमें शामिल महिलाएं सिर पर मंगल कलश रखकर शहर में निकली तो उनके साथ संकीर्तन करते हुए महिला-पुरुष भक्तगणों ने संपूर्ण मार्ग को श्रीकृष्ण एवं श्रीयमुनाजी के प्रेम में सराबोर कर दिया। विश्राम घाट पर बैंडबाजों की सुमधुर ध्वनि में भावविभोर भक्तजन श्रीयमुनाजी की भक्ति में लीन होकर नृत्य कर उठे। विश्राम घाट पर तीर्थपुरोहितों द्वारा संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, संयुक्त मुख्य अधिशाषी राजीव श्रीवास्तव, उप मुख्य अधिशाषी अनुराग पाठक, विशेष कार्याधिकारी विजयबहादुर सिंह, गिर्राज शरण, श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल के भक्तजन आदि ने यमुना जी का पूजन किया। श्रीयमुना जी के जल में दूध की धारा एवं पुष्पों की वर्षा की। संवाद
श्रीजी पीठ पर हुआ यमुना जी का पूजन
मथुरा। चतुर्वेद समाज की आदि गुरु गद्दी श्रीजी पीठ के तत्वावधान में बृहस्पतिवार को श्री यमुना षष्टी पर भगवती कात्यायनी, श्री यमुनाजी का तंत्रोक्त व वैदिकक्रम से पूजन-अर्चन एवं पंचामृत अभिषेक श्रीजी पीठाधीश्वर श्री ठाकुर जी बाबा महाराज एवं आचार्य मनीष बाबा, कपिल बाबा, भोला बाबा ने किया।
नवरात्र के षष्ट दिवस पर भगवती कात्यायनी का श्री यमुनाजी के स्वरूप में पूजन किया जाता है। वक्ताओं ने कहा कि मां कात्यायनी और श्री यमुनाजी दोनों एक ही स्वरूप है। श्रीजी गद्दी पर श्री यमुनाजी का प्रथम पूजन किया जाता है। यह परंपरा आदि श्रीजी पीठाधीश्वर शीलचंद्र बाबा महाराज ने प्रारंभ की थी, जो आज भी यथावत है। यमुना पूजन में मनोज पाठक, भास्कर बाबा, ऋषि बाबा, विजय चतुर्वेदी, मदन गोपाल, चिंताहरि चतुर्वेदी, पं लाला, पुरुषोत्तम चतुर्वेदी, अनूप चतुर्वेदी, आदि भक्त उपस्थित रहे । संवाद