समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद में मानकों की कसौटी भी किसानों के लिए मुसीबत बनेगी। इधर मौसम की मार और दूसरी तरफ भारतीय खाद्य निगम की गुणवत्ता को लेकर कड़ी निगरानी का खामियाजा किसानों को उठाना होगा।
गौरतलब है इस बार गेहूं की बुवाई के बाद अचानक बढ़े तापमान और फिर फसल पकने के बाद ओलावृष्टि, तेज हवा और बरसात का सीधा असर गेहूं की गुणवत्ता पर पड़ा है। इसके चलते फरह विकास खंड सहित जिले के कई हिस्सों में खराब गुणवत्ता का गेहूं पैदा हुआ। यह किसानों के लिए मुसीबत बनेगी। कृषि विभाग के अनुमान में भी इस बात की आशंका जताई गई थी।
सरकार ने गेहूं खरीद के लिए 1525 रुपये समर्थन मूल्य तो घोषित कर दिया है लेकिन इसी के साथ गेहूं की गुणवत्ता को लेकर भी मानक तय किए हैं। इसमें गेहूं में मौजूद नमी की मात्रा, उसके आकार, काले रंग को लेकर सख्त मानक हैं। सरकारी खरीद की उम्मीद में बैठे किसानों को इन मानकों का भय भी सता रहा है।
गेहूं खरीद प्रभारी और डिप्टी आरएमओ रामबख्श ने बताया खरीद के लिए एफसीआई के मानक तय हैं। खरीद का कार्य मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा। इस दौरान किसान को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा। अभी तक खुले बाजार में जो गेहूं आया है उसकी गुणवत्ता सही नजर आ रही है।
78 केंद्रों पर खरीद
गेहूं खरीद के लिए इस बार जिले 78 केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसमें पीसीएफ के 67, खाद्य विपणन विभाग के चार, एग्रो के तीन, कल्याण निगम के तीन और एफसीआई का एक क्रय केंद्र खोला जाना है। किसान अपनी सुविधानुसार किसी भी क्रय केंद्र पर अपना गेहूं बेच सकते हैं। इन पर 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जाएगा। ये भुगतान चेक या आरटीजीएस सेवा के माध्यम से होगा।
फैक्ट फाइल
1.95 लाख हेक्टेअर- मथुरा में गेहूं की बुवाई
35 क्विंटल प्रति हेक्टेअर पैदावार का अनुमान
6.82 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन का अनुमान
78 क्रय केंद्रों पर 1525 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद
बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि के बाद 10 प्रतिशत तक गुणवत्ता में नुकसान का आंकलन