फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुबह पहला काम, पानी का इंतजाम

Mon, 16 May 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
विज्ञापन
पेयजल संकट
विज्ञापन
जनपद की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल बछगांव में पानी का गंभीर संकट है। गांवों में भूजल खारा है। पीने का पानी एक-दो किमी दूर से ही लाना पड़ता है। हैंडपंपों के खराब होने की दर अधिक है तो खारा पानी भी अक्सर गांव में उपलब्ध नहीं होता। तड़के से ही पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती है।
विज्ञापन

बछगांव के सभी मजरों में पेयजल की किल्लत है। क्षेत्र की आबादी करीब 20 हजार है। पेयजल लाने के लिए सुबह से ही महिलाएं और बच्चे जुट जाते हैं। गांव के बाहर बने ऐसे कुएं, ट्यूबवैल और हैंडपंपों जिनका पानी खारा नहीं है उनसे पानी भरकर लाया जाता है।
खेतों में बने इन कुंओं, हैंडपंप पर लंबी लाइन लग जाती है। इस लाइन में आगे का स्थान पाने के लिए तड़के ही लोग घर छोड़ देते हैं। बहुत से लोगों को पानी तो दोपहर में जाकर मिल पाता है। 
विज्ञापन

पूर्व प्रधान देवकी के प्रयासों से यहां जल निगम ने वर्ष 2012 में पानी की टंकी का निर्माण कराया था। लेकिन अभी तक इससे पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। गांववासियों के अनुसार, अधिकारी बताते हैं ‘तकनीकी’ खराबी के चलते पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 

--
टूट रही 2012 में जगी उम्मीद
पेयजल संकट के समाधान के लिए 2012 में बनाई गई पानी की टंकी से जगी उम्मीद अब टूटने लगी है। शुरुआत में तो ग्रामीणों ने काफी प्रयास किए। अधिकारियों से मिले, प्रदर्शन किए लेकिन तीन साल से कुछ नहीं हुआ। शिकायत अब भी होती है लेकिन समाधान की उम्मीद कम ही होती है। पानी की टंकी से आपूर्ति होती तो बछगांव के साथ आसपास के गांव नगला देविया, शेरा, सबला, गुलाल, नगला छत्तरी, बैरू, रतू आदि में भी पेयजल का संकट नहीं रहता।
विज्ञापन

--
पानी की टंकी शुरू हो, इसे लेकर कई बार अधिकारियों से मिले और आश्वासन भी मिला। लेकिन अभी तक पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हुई। 
-चौधरी लक्ष्मन सिंह
----
गांव में मीठे पानी की टंकी के  निर्माण को लेकर लोगों में उत्साह था। लेकिन पिछले ती वर्ष से टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है। 
- बलजीत सिंह
----
पानी के संकट के प्रति अधिकारी संवेदनहीन बने हुए हैं। बार-बार शिकायत पर भी कोई असर नहीं होता। समस्या का समाधान होना ही चाहिए।
-संजय सिंह 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें