वृंदावन में कूड़ा निस्तारण पर एनजीटी द्वारा 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद जिला प्रशासन मथुरा को लेकर सतर्क हो गया है। शहर में संचालित औद्योगिक इकाईयों को बाहर भेजने के लिए पांच दिन का समय दिया है। इसके बाद इकाईयों को बंद करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
सोमवार को यमुना कार्य योजना के नोडल अधिकारी एडीएम वित्त रवीन्द्र कुमार ने शहरी में स्थापित वाइब्रेटर सहित अन्य इकाईयों के उद्यमियों के साथ बैठक की। इस दौरान पूर्व में दी गई 15 दिन की अवधि का उल्लेख करते हुए एडीएम ने 5 दिन में अब शहर से उद्योग बाहर ले जाने के साफ निर्देश दिए। इसके लिए उद्यमियों को बाद के निकट, बाद गांव के निकट, छरौरा और गौर केन्द्र का सुझाव भी दिया। इस पर फिलहाल उद्यमियों ने कोई सहमति नहीं दी।
गौरतलब रहे कि शहरी उद्योगों को लेकर गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने एनजीटी में याचिका दायर कर दी है। इस पर केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड ने याची की प्रार्थना को उचित बताया है। इस पर मुख्य सचिव और डीएम को नोटिस जारी हुए हैं। इससे पहले ही प्रशासन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।