विश्राम घाट पर बने छोटे-छोटे मंदिर गाद से भरे हैं, लेकिन इन्हें साफ करने जहमत न तो नगर निगम उठा रहा है और न ह यमुना स्वच्छता से जुड़े होने का दम भरने वाले सामाजिक संगठन। नगर निगम के सफाई कर्मचारी सिल्ट उठाने के बजाए उसे यमुना में ही बहाने में जुट गए हैं। यमुना किनारे घाटों की ओर जाने वाली गलियों में भी कीचड़ भरा है। दिनभर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को इससे बड़ी परेशानी हो रही है।
यमुना में चलने लगीं नावें
यमुना का पानी उतरने के बाद अब नौका विहार भी होने लगा है। करीब 20 दिन नावें बंद रहने से नाविकों के सामने रोजी-रोटी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी, लेकिन पानी कम होने के बाद श्रद्धालु भी आने लगे हैं और वे नौका विहार भी कर रहे हैं। इससे नाविकों के चेहरे पर खुशी का माहौल है।
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कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन घाटों से सिल्ट नहीं हटाई जा रही है। एक दो दिन बाद यही सिल्ट फिर से यमुना में ही समा जाएगी। इससे फिर घाटों के नीचे बालू नहीं सिल्ट जमा होगी, जो घाटों पर पानी में उतरकर पूजा करने वालों के पैरों से यमुना जल को गंदा करेगी।
-प्रहलाद शर्मा
सभी को पता है कि बाढ़ के साथ घाटों पर सिल्ट जमा हो गई है। इसे जल्द न हटाया गया तो यह फिर यमुना में ही चली जाएगी। नगर निगम ने इस ओर अब तक कोई ध्यान भी नहीं दिया है। कई घाटों पर तो बड़ी मात्रा में सिल्ट है। इसे जल्द हटाया जाए। अब तो श्रद्धालु भी यमुना पूजन के लिए आने लगे हैं।
-सुरेश नाविक
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यमुना का जल स्तर सामान्य होने के बाद अब श्रद्धालुओं का आवागमन शुरू हो गया है, लेकिन घाटों पर सिल्ट जमी हुई है। उसे हटाने का काम नहीं किया जा रहा है। कई दिन हो गए घाटों पर गंदगी को पड़े हुए, लेकिन किसी को परवाह नहीं है। -लाला राम नाविक
अब बाढ़ खत्म हो चुकी है। लोगों की सामाजिक गतिविधियां सामान्य होने लगी हैं। लोग यमुना का आचमन और स्नान करने के लिए पहुंचने लगे हैं। बाढ़ के पानी के साथ घाटों पर आई गंदगी परेशानी का कारण बनी हुई है। नगर निगम प्रशासन को जल्द इस दिशा में काम करना चाहिए। -लोकेंद्र नाथ कौशिक