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Mathura: बाढ़ के बाद बुरे हालात, धंस गई फर्श और दीवारों में आईं दरारें; पानी उतरने के बाद बढ़ी लोगों की समस्या

Mon, 07 Aug 2023 11:27 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मथुरा में बाढ़ के बाद बुरे हालात हो गए। लोगों की घरों की फर्श धंस गई और दीवारों में दरारें आईं। पानी उतरने के बाद लोगों की समस्या बढ़ गई है। 
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Mathura News: घरों में भरा पानी...यह अब कम हो गया है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना में बाढ़ के कारण खादर क्षेत्र की अनेक कॉलोनियों के वाशिंदों की समस्याएं अब भी खत्म नहीं हुईं हैं। पानी भले ही उतर चुका है, लेकिन घरों के आसपास और खाली भूखंडों में अब भी भरा है। घरों में कई दिन तक पानी भरने के कारण कीमती सामान खराब हो गया है। मकानों के फर्श धंस गए हैं। दीवारों पर दरारें आ गई हैं। राशन का सामान खराब हो चुका है। 

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पानी और गंदगी से बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। उधर, नगर निगम प्रशासन और चिकित्सा महकमे के दावे महज कागजों तक सीमित हैं। न तो पानी निकासी और सफाई के कोई इंतजाम है और न ही चिकित्सा व्यवस्था के। बाढ़ के दौरान खादर क्षेत्र की सभी कॉलोनियों में पानी भर गया था। गलियों और घरों में पांच से छह फीट तक पानी भर जाने के कारण लोगों को घर तक छोड़ना पड़ा। 

दो सप्ताह तक घरों से बाहर रहे लोग जब लौटे तो घरों की हालत देख उनके होश उड़ गए। पानी से घिरे रहने के कारण दीवारों पर सीलन, सामान खराब, फर्श धंसे हुए, घर में सिल्ट जमा और गलियों व नालियों में पानी के साथ आई गंदगी जमा थी। जैसे-तैसे उन्होंने आशियानों को संभालना शुरू किया, लेकिन धूप निकलने के बाद मकानों में दरारें आने लगी। खाली भूखंडों में भरा पानी तो अब तक नहीं निकला। 

निचले इलाकों में भी पानी भरा है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। पानी से उठती सड़ांध से लोगों का जीना मुहाल हो गया है, लेकिन अब तक किसी भी विभाग ने सुध नहीं ली है। नगर निगम ने सफाई की व्यवस्था की है न ही प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी जायजा लेने आया है। चिकित्सा विभाग द्वारा भी बीमारियों से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।

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सड़क तो बनी है लेकिन नालियां नहीं बनी हैं। इससे पानी नहीं निकल पाता। पानी भरने के कारण फर्श बैठ गए हैं। दीवारों में दरारें आ गईं हैं। कीचड़ भरा है। साफ करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन, नगर निगम की कोई व्यवस्था नहीं है। चिकित्सा विभाग ने कोई कैंप नहीं लगाया। ठहरे पानी पर मच्छर पैदा हो रहे हैं। -आलोक, वार्ड 32

क्षेत्र में अभी भी बाढ़ का पानी भरा है। गड्ढों और खाली भूखंडों में भरा पानी नहीं निकल पाया है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की कोई व्यवस्था नहीं है। घरों की दीवारों में भी दरारें आ गईं हैं। -भोला वार्ड 32
 

गांव में बाढ़ के पानी के कारण चार-पांच मकान गिर गए हैं। विधायक और एसडीएम भी आए, उन्होंने हालचाल जाना, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। खेतों में गंदा पानी भरा हुआ है। जिससे बीमारियों के फैलने की आशकां है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई शिविर नहीं लगाया गया और न ही छिड़काव कराया गया है। -ओमप्रकाश, वार्ड 23

क्या बताएं, बाढ़ में सब कुछ बर्बाद हो गया। बाढ़ का पानी घरों में घुसा तो सब कुछ ऐसे ही छोड़ कर जाना पड़ा। वापस आने पर देखा तो घरों में कीचड़ जमा है। दीवारों पर दरारें आ गई हैं। गंदा पानी भरने से सामान भी काफी खराब हुआ है। प्रशासन द्वारा कोई मदद नहीं की गई है। -सुंदर पाल, वार्ड 29

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कई मकान फट गए हैं। निचले स्थानों पर बाढ़ का पानी भरा है। इससे बीमारियां फैलने का खतरा बन हुआ है। नगर निगम और प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं है। अपनी तरफ से ही पानी की व्यवस्था कर निगम के टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति की जा रही है। चिकित्सा विभाग ने कोई शिविर नहीं लगाया। -मनोज धनगर वार्ड 32

बाढ़ के पानी ने काफी नुकसान किया है। कई घर ढह गए और खेती का भी नुकसान हुआ है। फसलें बर्बाद हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कोई शिविर नहीं लगाया है। नगर निगम ने एक दो स्थानों पर ही छिड़काव किया है। प्रशासन से भी पीड़ितों को कोई मदद नहीं मिली है। -राकेश यादव पार्षद वार्ड 29
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