कोसीकलां (मथुरा)। भीषण गर्मी में नवीन मंडी के व्यापारी पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। मंडी की पेयजल व्यवस्था के लिए बनाई गई टंकी 30 वर्ष से खराब पड़ी है। हैंडपंप की कोई व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी के लिए बनी टंकी सूखी पड़ी है। अगर जेब में पैसा है तो मंडी में पानी है। आढ़तियों का आरोप है कि मंडी अधिकारी केवल राजस्व वसूल करने में जुटे हैं। समस्याओं के निदान के लिए फंड की कोई व्यवस्था नहीं है।
सुविधाओं के नाम पर यह मंडी बदहाल है। साफ सफाई की सुचारु व्यवस्था मंडी में न होना आम है, लेकिन इस प्रचंड गर्मी में व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है। मंडी प्रशासन की तरफ से पेयजल के लिए टंकी बनाई गई है, जो कि बनने से लेकर आज तक कभी शुरू नहीं हो सकी। हैंडपंप की बात करना तो बेमानी है। मंडी में पानी की सीमेंट की टंकी बनाई गई है, जो कि वर्षों से भरी नहीं गई है। अधिकतर टंकी की टोंटी गायब हैं। मंडी में आने वाले ज्यादातर किसानों को खरीदकर पानी पीना पड़ता है तो वहीं व्यापारियों को 30 से 50 रुपये प्रतिदिन का पानी खरीदना पड़ रहा है।
यहां के व्यापारियों का कहना है कि हम लोग कई बार मंडी प्रशासन से पेयजल व्यवस्था सही करने और मंडी में आरओ प्लांट सही कराने के लिए कहा गया, लेकिन मंडी प्रशासन फंड न होने का बहाना बनाकर शांत कर देता है।
मंडी में पेयजल की बड़ी समस्या है। खरीद कर पानी पीना पड़ता है। मंडी प्रशासन से वाटर कूलर सही कराने को कहा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- ऊधम सिंह फौजदार, अध्यक्ष, खाद्यान्न विक्रेता व्यापारी संघ
पानी की समस्या से पूरी मंडी जूझ रही है। टैंकर का पानी न आए तो यहां पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। मंडी में एक भी हैंडपंप नही है।
-सतीश कुमार, व्यापारी
मंडी में पेयजल समस्या के निराकरण के लिए बनी टंकी वर्षों से खराब है। जिसे चालू कराने का कोई प्रस्ताव आज तक मंडी प्रशासन ने नहीं भेजा है।
- शिब्बी चौधरी व्यापारी
मंडी में अगर व्यापार करना है तो पानी का इंतजाम करना पड़ेगा। मंडी प्रशासन पर भरोसा करना बेकार है। इससे न केवल परेशानी हो रही है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।- बिजेंद्र तिवारी आढ़तिया