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सफेद चादर से दीपक की लौ हो गई आर-पार

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छाता (मथुरा)। कोतवाली छाता के गांव नरी-सेंमरी में तीज की चमत्कारिक आरतियों की झलक पाने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। देवी मां के प्रिय एवं परम भक्त ध्यानू भगत (आगरा) के परिजनों ने तीज की चमत्कारिक आरती की। इस दौरान बड़े-बड़े दीपकों की लौ कपड़े की चादर के आरपार हो गई, मगर चादर नहीं चली। श्रद्धालुजन मां के चमत्कार को देख जयकारे लगाने गए।
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सच्चे दरबार की जय, देवी मैया की जय के जयकारों से मंदिर प्रांगण गुंजायमान हो गया। भीड़ में हर कोई आरतियों की एक झलक पाने को आतुर था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एसडीएम कमलेश गोयल एवं सीओ वरुण कुमार, छाता कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार एवं मेला प्रभारी सब इंस्पेक्टर नीरज भाटी ने मय पुलिस बल के तैनात रहे।
मंदिर प्रांगण से प्रथम आरती आगरा निवासी पूर्व विधान परिषद सदस्य अनुराग शुक्ला के पुत्र अनिरुद्ध शुक्ला, केशन बल्लभ ने सात बजे निकाली। इस आरती को देखने के लिए हजारों भक्तगण अपने-अपने स्थानों पर टकटकी लगाए बैठे थे। चमत्कारिक आरतियों के महत्व को जानने के लिए दर्शक उमड़ पड़े। बडे़-बडे़ दीपकों की तेज लौ के ऊपर सफेद चादर को रखा गया।
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चादर के आरपार दीपक लौ निकल गई, मगर चादर नहीं जली। इसके बाद ध्यानू भगत के तीन और परिजनों ने इसी तरह देवी मां की आरती की। बीरी सिंह जादौन, अशोक भार्गव, कुमार सिंह, किशनपाल, नत्थी सिंह, चरन सिंह, हरी, लोकेंद्र, विक्रम, नीरज, मनोज, विजेंद्र आदि मौजूद थे।
ध्यानू भगत नगरकोट कांगड़ा से लाए थे देवी मां को
आगरा निवासी ध्यानू भगत नगरकोट कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) वाली देवी मां के परम भक्त थे। मां की पूरी कृपा थी। ध्यानू भगत की सेवा से मां ने प्रसन्न होकर एक दिन वरदान मांगने को कहा। इस पर ध्यानू ने देवी मां से आगरा चलने का वर मांगा। देवी मां ने भक्त ध्यानू के सामने एक शर्त रख दी कि रास्ते में तू जहां भी पीछे मुड़कर देखेगा तो मैं वहीं अंर्तध्यान हो जाऊंगी। शर्त के बाद देवी मां भक्त के साथ आगरा के लिए चल पड़ीं। रास्ते में छाता के सेंमरी गांव के निकट भक्त को पीछे देवी मां के आने पर कुछ शक हुआ तो मुड़ कर देख लिया। बस देवी मां वहीं अंर्तध्यान हो गईं। सेंमरी की झाड़ियों में मां का विग्रह मिला, तभी से यहां पूजा हो रही है तथा ध्यानू के वंशज यही आकर पूजा-अर्चना करते हैं।
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