परीक्षित कौशिक
गोवर्धन। गिरिराज जी की पावन धरती गोवर्धन ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने को तैयार है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार है जबकि राष्ट्रपति गिरिराज महाराज की परिक्रमा देंगी। प्रस्तावित कार्यक्रम में 21 मार्च को वह गोवर्धन पहुंचकर गोल्फ कार्ट से परिक्रमा लगाएंगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह दौरा 19 से शुरू होकर तीन दिवसीय प्रस्तावित है, जिसमें मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन शामिल हैं। गोवर्धन में उनका मुख्य कार्यक्रम 21 मार्च को है। वे प्रसिद्ध गिरिराज महाराज दानघाटी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगी। यहां वे लगभग 10 मिनट तक पूजन करेंगी। इसके बाद गिरिराज जी की परिक्रमा सप्तकोसी या पूर्ण परिक्रमा भी करेंगी। यह पहली बार होगा जब कोई राष्ट्रपति गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करेंगी, जो लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है। कई दिनों से गोवर्धन के मुख्य मार्ग, मंदिर परिसर और परिक्रमा पथ फूलों, झंडियों, बैनरों और रंग-बिरंगी सजावट से जगमगा रहे हैं। दानघाटी मंदिर को फूलों की घाटी जैसा सजाया जा रहा है। स्थानीय लोग, श्रद्धालु और व्यापारी विशेष उत्साह से जुड़े हैं। राम कुमार, केशब देव सैनी, रवि शर्मा, योगेश ठाकुर जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि गोवर्धन पहले से ही देश-विदेश के भक्तों का केंद्र है, लेकिन राष्ट्रपति का आगमन इसे नया आयाम देगा।
यह धार्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। व्यापारियों ने दुकानों को सजाया है, विशेष ऑफर तैयार किए हैं। धार्मिक संगठन स्वागत के लिए छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। जिला प्रशासन, पुलिस और सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी से जुटे हैं। तीन अस्थायी हेलीपेड बनाए गए हैं, साफ-सफाई, रंग-पुताई, सौंदर्यीकरण और यातायात नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। डीएम, एसएसपी और अन्य अधिकारी ई-रिक्शा से परिक्रमा मार्ग का जायजा ले चुके हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सेफ हाउस तैयार किए गए हैं। गोवर्धन के लोग इसे गर्व का विषय मान रहे हैं। यह दौरा न सिर्फ भक्ति की भावना को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक और अविस्मरणीय होगा। राष्ट्रपति का यह आगमन ब्रज की आस्था और एकता का प्रतीक बनेगा। संवाद