गैस न मिलने पर कोयले की भटटी पर चाय बनाता बुजुर्ग।
मथुरा। गैस सिलिंडरों की किल्लत के चलते होटल और रेस्टोरेंट संचालक वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की ओर रुख करने लगे हैं। कई जगह पर ईंट की भट्ठियां बनाना शुरू हो गईं हैं। कहीं तो इनका प्रयोग तक शुरू हो गया है। कोयले, लकड़ी से धधकती भट्ठियाें पर भोजन बनाया जा रहा है। कई जगह इलेक्ट्रिक भट्ठियों, इंडक्शन कुकटॉप और अन्य विद्युत उपकरणों को अपना रहे हैं। हालांकि सिलिंडरों की आपूर्ति में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है।
कुछ समय पहले तक होटलों में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित रसोईघरों में ईंट की भट्ठियां भूली-बिसरी कहानी सी लगने लगीं थीं। व्यावसायिक गैस संकट ने इन पारंपरिक भट्ठियों को फिर से चालू करा दिया है। इलेक्ट्रिक भट्ठियां, इंडक्शन कुकटॉप और अन्य बिजली से चलने वाले उपकरणों के उपयोग से बिजली की खपत बढ़ गई है।
गैंस एजेंसियों पर भीड़, उपभोक्ता परेशान
घरेलू गैस सिलिंडर न मिलने से उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई घरों में पड़ोसियों से सिलिंडर मांगकर खाना बनाया जा रहा है। गैस एजेंसियों पर दिनभर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। वहीं पोर्टल के काम न करने से समाधान नहीं निकल पा रहा है। महाविद्या कॉलोनी निवासी आनंद गर्ग ने बताया कि गैस नहीं होने के चलते चूल्हे पर खाना बनाना पड़ रहा है। धौलीप्याऊ स्थत गैस एजेंसी पर सिलिंडर लेने आईं हेमलता ने बताया कि घर पर गैस खत्म हो गई है पड़ोसी से सिलिंडर लेकर खाना बना रहे हैं।