मथुरा। नगर निगम की टीम ने बृहस्पतिवार सुबह कृष्णपुरी तिराहे के पास बिना कुरा बंटवारा के एक जमीन पर बनाई जा रही दीवार को ध्वस्त करा दिया। साथ ही फिर से निर्माण न करने की चेतावनी दी है। हालांकि निर्माण करने वाले भूमि उन्हीं की होने का दावा करने के साथ ही निगम की कार्रवाई को गलत बता रहे हैं। वहीं मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम चंद्र प्रकाश ने एडीएम एफआर डॉक्टर पंकज वर्मा को मामले की जांच सौंपी है।
अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह ने बताया है कि कृष्णापुरी तिराहा पर चर्च के पास हजारों वर्ग मीटर खाली भूमि पड़ी हुई है। चार दिन से इस भूमि के आधे से अधिक हिस्से पर कुछ लोग चहारदीवारी व गेट लगाने का कार्य करा रहे थे। उसी के पास नगर निगम की भी जमीन है। बृहस्पतिवार की सुबह करीब 6 बजे नगर निगम की टीम ने दीवार को ध्वस्त करा दिया।
साथ ही वहां अपना स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया। उन्होंने बताया है कि खसरा संख्या 3193 नॉन जेडए की भूमि है। इसमें नगर निगम की करीब तीन हजार वर्गमीटर भूमि है। इस खाते में अन्य कई सह खातेदार भी हैं। 28 जून को शिकायत मिली कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद कुछ लोगों द्वारा इस भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है। जांच में शिकायत सही मिलने पर 30 जून को नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद भी साक्ष्य उपलब्ध न कराने पर कार्रवाई की गई। इधर, निर्माण करने वालों के प्रार्थना पत्र पर सिटी मजिस्ट्रेट ने इस जमीन की पैमाइश के आदेश जारी किए थे।
50 लाख घूस नहीं देने पर काम रुकवाने का आरोप
भूमि पर दावा करने वाली अर्चना के भतीजे मयंक का आरोप है कि नगर निगम के एक अधिकारी ने उनसे 50 लाख रुपये की मांग की थी। पैसे नहीं देने पर ध्वस्तीकरण की धमकी दी और कमरे में बंद करके टॉर्चर किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया है कि निर्माण कार्य के दिन राजस्व टीम, सदर थाने का पुलिस फोर्स समेत कुछ नगर निगम के अधिकारी भी मौजूद थे। सभी की निगरानी में ही चारदीवारी के निर्माण कराया गया था। उनके पास इसके साक्ष्य भी मौजूद हैं।