बरसाना। राधारानी मंदिर तक श्रद्धालुओं को ले जाने के लिए बनाए गए रोपवे पर रखरखाव के नाम पर पांच दिन के लिए ताला जड़ दिया गया है। अब इसके 17 अक्तूबर के बाद आरंभ होने की संभावना है।
राधारानी की नगरी में करोड़ों की लागत से बने रोपवे को सेवा का प्रतीक कहा गया था। अब यह लापरवाही का उदाहरण बनता जा रहा है। मार्च 2025 में हुए हादसे के दौरान इसके तीन डिब्बे आधार स्टेशन से टकरा गए थे। तब पुलिस ने संचालक और निदेशक पर मुकदमा दर्ज किया था। हादसे के बाद रुड़की स्थित प्रौद्योगिकी संस्थान की जांच में केबल की घिसावट और ब्रेक व्यवस्था की कमजोरी सामने आई थी।
इसके बाद मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने पुरानी कंपनी को हटा कर संचालन का ठेका दामोदर रोपवेज इन्फ्रा लिमिटेड को सौंप दिया। यह बदलाव भी सवालों के घेरे में है। कारण कंपनी तो बदल गई लेकिन हालात वही हैं। नतीजा बुजुर्ग और दिव्यांग भक्त सीढ़ियों से चढ़कर लाडलीजी के दर तक पहुंच रहे हैं। भक्त लाठी का सहारा लेकर सीढ़ी चढ़ते हैं और बीच-बीच में बैठकर अपने दर्द को छिपाने के लिए राधारानी का जयकारा लगाते हैं।
आसाम के विजय ने कहा कि उन जैसे बूढ़े लोग रोपवे से ही ऊपर जा पाते थे, अब इसे बंद देखकर बस मन रो देता है। सीढ़िया नहीं चढ़ी जाती, पर राधा रानी के भरोसे फिर भी जा रहे हैं। दिल्ली से आए दिव्यांग सोनू का कहना है कि जब रोपवे चलता है तो लगता है राधा रानी ने राह खोल दी, अब इसे बंद देखकर लग रहा है जैसे कृपा भी थम गई है।
रोपवे की मरम्मत का कार्य चलने के कारण इसे 13 से 17 अक्तूबर तक बंद किया गया है। बीते दिनों में हुईं घटना होने के बाद यह निर्णय लिया गया है। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद इसे शुरू कराया जाएगा।
एसबी सिंह, उपाध्यक्ष, एमवीडीए