मथुरा। बांके बिहारी मंदिर में स्वर्ण रजत निर्मित हिंडोला। फाइल फोटो
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वृंदावन। सावन मास शुरू होते ही मंदिरों में विभिन्न कार्यक्रमों की परंपरा शुरू हो जाती है तो वहीं हरियाली तीज पर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में झूलन महोत्सव का शुभारंभ हो जाता है। इस बार 27 जुलाई को यह उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान ठाकुर बांकेबिहारी लाल स्वर्ण और रजत से निर्मित ऐतिहासिक झूले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।
मंदिर के सेवायत नितिन सांवरिया ने बताया कि यह झूला वर्ष 1947 में तैयार किया गया था और 15 अगस्त के दिन पहली बार ठाकुरजी को समर्पित किया गया। उसी दिन देश को स्वतंत्रता भी मिली थी। यह झूला 20 किलो सोने और 100 किलो चांदी से निर्मित है। इस ऐतिहासिक झूले को हिंडोला भी कहा जाता है। इस दिन ठाकुरजी को हरी पोशाक पहनाई जाती है और घेवर, फैनी व अन्य मिष्ठानों का भोग अर्पित किया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंचकर ठाकुरजी के झूले वाले दर्शन कर स्वयं को कृतार्थ मानते हैं।
झूलन महोत्सव को लेकर बाजारों में रौनक, मोर और लकड़ी के झूलों की बढ़ी मांग
वृंदावन। हरियाली तीज से शुरू होने वाले झूलन महोत्सव को लेकर वृंदावन के बाजारों में भारी चहल-पहल देखने को मिल रही है। भक्तजन अपने लड्डू गोपाल के लिए अलग-अलग डिजाइन के झूले खरीद रहे हैं, जिनमें लकड़ी, स्टील और मोर आकृति वाले झूले प्रमुख हैं।
पोशाक व्यवसायी गणेश अग्रवाल ने बताया कि झूलों की कीमत 100 से 2000 रुपये तक है। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालु भारी संख्या में झूले खरीद रहे हैं। कई भक्त ऑनलाइन ऑर्डर देकर देश-विदेश से झूले मंगवा रहे हैं। खास बात यह है कि इन झूलों को स्थानीय कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित तौर से किया गया है जिससे स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा मिल रहा है। झूलन महोत्सव के दौरान हर घर और मंदिर में लड्डू गोपाल को झूला झुलाया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों ने इस बार डिजाइन और साइज में विशेष विविधता दी है। वृंदावन के प्रमुख बाजारों में इन दिनों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।