फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर: लतापताओं के मंदिर से... राजस्थान की हवेली शैली के मंदिर में विराजने का रहा सफर

Tue, 21 Nov 2023 10:07 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

वृंदावन में श्री बांके बिहारी मंदिर में कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ हो गया है। अब तक लतापताओं के मंदिर से राजस्थान की हवेली शैली के मंदिर में ठाकुरजी के विराजने का सफर रहा है। 
विज्ञापन
बांके बिहारी मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तीर्थनगरी मथुरा के वृंदावन में राजस्थान की हवेली शैली के आधार बने ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में आराध्य के दर्शनों के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं। लगातार तेजी से बढ़ रही भीड़ को देखते हुए बांकेबिहारी कॉरिडोर के निर्माण के लिए हाईकोर्ट ने भी रास्ता साफ कर दिया है। इससे पहले ठाकुर बांकेबिहारी छह मंदिर विराज चुके हैं। वर्तमान मंदिर में सातवीं बार आराध्य विराजमान हुए।

विज्ञापन


ठा.बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार, स्वामी हरिदासजी ने अपने जीवन के 31वें वर्ष में संगीत साधना से निधिवन में ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य किया। उन्होंने ठाकुर बांकेबिहारी को लतापताओं से बने पहले मंदिर में विराजमान किया था। 

यह भी पढ़ेंः- बांके बिहारी मंदिर: हादसे का मर्म जान गौरव के 'विवेक' ने रखी थी कॉरिडोर की नींव, सीएम योगी ने दी थी जिम्मेदारी

विज्ञापन

स्वामीजी के निधन के बाद परम भक्त जगन्नाथ महाराज ने रंगमहल नामक दूसरा मंदिर बनवाया। इस मंदिर में बांकेबिहारी लगभग वर्ष 1719 तक भक्तों को दर्शन दिए। उसी साल करोली की रानी के स्नेह बंधन पर उनके राज्य में चले गए ठाकुरजी वर्ष 1721 तक वहां अपने लिए बनाए गए तीसरे मंदिर में विराजित हुए।

वर्ष 1769 तक ठा.बांकेबिहारी भरतपुर में बने चौथे मंदिर में विरामान हुए। वहां से गोस्वामी रूपानंद 11 अप्रैल 1769 में चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि को बिहारीजी को वापिस राजस्थान से वृंदावन लाए। सेवायत ने बताया कि इसके बाद ठाकुरजी लगभग वर्ष 1787 तक निधिवनराज में बनाए गए पांचवें मंदिर में विराजे। उसी वर्ष सेवायतों ने ठाकुर बांकेबिहारी को पुराने शहर में बने छठे मंदिर में विराजमान किया। 

यह भी पढ़ेंः- बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर: सांसद हेमामालिनी बोलीं-भक्तों को सहज होंगे आराध्य के दर्शन, पयर्टन को मिलेगा बढ़ावा
 
विज्ञापन

उसी मंदिर के परिसर का वर्ष 1864 में विस्तार हुआ और राजस्थानी हवेली शैली के वर्तमान सातवें मंदिर में ठाकुर बांकेबिहारी भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रहलाद वल्लभ गोस्वामी ने कहा कि शासन से मांग की है कि अब यदि आठवीं बार आराध्य के लिये नया मंदिर बनाया जाए तो वह कॉरिडोर की अपेक्षा उचित होगा। इससे वृंदावन का स्वरूप भी बना रहेगा और ठाकुरजी अयोध्या की तर्ज पर नवीन मंदिर में विराजमान हो जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें