मथुरा। सूर्यनारायण 15 जनवरी को उत्तरायण में प्रवेश करेंगे। सूर्योदय होते ही खरमास भी समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही 16 जनवरी से विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन आदि शुभ कार्य भी शुरू हो जाएंगे। लोगों को एक माह बाद 15 जनवरी को बैंडबाजों की धुन सुनने को मिलेगी।
15 जनवरी को भोर के समय 2:44 बजे सूर्यनारायण मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्यदेव उत्तरायण में प्रारंभ कर जाएंगे। वैज्ञानिक भाषा में कहें तो सूर्य अब पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में आंशिक रूप से अधिक चमकेंगे। धार्मिक व शुभ कार्य को शुरू करने के लिए सूर्य का उत्तरायण होना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके साथ ही खरमास भी समाप्त हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्य कामेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि मकर संक्रांति पर सूर्यदेव मकर राशि में गोचर करते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति को स्नान-दान के लिए इतना महत्वपूर्ण माना गया है। बताया कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाने के बाद 16 जनवरी से विवाह, यज्ञोपवीत, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य प्रारंभ हों जाएंगे। हालांकि बैंडबाजों की धुन तो 15 जनवरी को ही सुनाई देगी, लेकिन पाणिग्रहण संस्कार 15/16 की रात 12 बजे के बाद ही होंगे। इसलिए 16 जनवरी से ही शुभ कार्य आरंभ होना माना जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि पंचांगों में दिए मुहूर्त के आधार पर 16 जनवरी से विवाह के साथ अन्य शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे। दृश्य गणित और प्राचीन गणित के पंचांगों में लिखे मुहूर्त के आधार पर मंगल कार्य 16 मार्च तक होंगे। तत्पश्चात 17 मार्च से होलिका अष्टक लग जाएंगे। होलिका दहन के बाद 27 मार्च को होली की दूज को स्वयं सिद्ध मुहूर्त, बसंत ऋतु मीन राशि के सूर्य में सभी शुभ कार्य फिर से आरंभ होंगे और 23 अप्रैल तक चलेंगे। 9 अप्रैल से नव विक्रम संवत 2081 की प्रारंभ हो जाएगा। 28 अप्रैल से 5 जुलाई तक शुक्र ग्रह अस्त रहेगा और सभी मांगलिक कार्य बंद रहेंगे। 5 जुलाई से विवाह आदि मुहूर्त पुनः प्रारंभ हो जाएंगे जो कि देव शयनी एकादशी से पूर्व तक चलेंगे।