मथुरा। बाल शिशु गृह में 10 दिन से एक वर्षीय सरस्वती अपना प्रमाण नहीं देने के चलते मां पूजा और पिता आनंद से दूर थी। बुधवार को मां-पिता दोनों बेटी को लेकर मध्य प्रदेश के जिला जबलपुर गांव मझौली अपने घर पहुंचे। जैसे ही सरस्वती दादी के घर पहुंची तो वह उसे गले लगाकर रोने लगीं।
रेलवे जंक्शन पर 22 अगस्त की रात को प्लेटफार्म एक पर मां लघुशंका के लिए गई थी। इसी बीच एक युवक सरस्वती का अपहरण करके ट्रेन से आगरा की तरफ भाग गया था। जीआरपी ने सीसीटीवी कैमरों से जांच पड़ताल की तो जीआरपी ने 24 अगस्त को बच्ची को बरामद कर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया था। पिता के पास सरस्वती के कोई अभिलेख नहीं होने से उनको सरस्वती नहीं मिली थी। मां-पिता 10 दिनों से मध्य प्रदेश और दिल्ली तक बेटी का प्रमाण पत्र लेने के लिए दौड़ते रहे।
मंगलवार को मां-पिता दोनों ही सभी अभिलेख लेकर बाल कल्याण समिति पहुंचे। जहां से लिखापढ़ी करके उनको बच्ची सौंप दी गई। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने कहा कि बच्ची को सौंप दिया गया है। सरस्वती के मां-पिता सभी दस्तावेज लेकर आ गए थे।