शरद पूर्णिमा पर तीर्थनगरी के मंदिरों में आराध्य धवल चांदनी में भक्तों को दर्शन देंगे। रविवार को बांकेबिहारी स्वर्ण रजत सिंहासन पर राजभोग और शयनभोग के समय भक्तों को दर्शन देंगे। शरद पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक वृंदावन की एक माह की परिक्रमा भी रविवार से प्रारंभ हो जाएगी।
सुबह 7:45 बजे बांकेबिहारी मोर मुकुट, श्वेत कटि काछनी व बांसुरी धारण कर भक्तों को दर्शन देंगे। राजभोग आरती दोपहर 12:55 पर होगी। वहीं सांय 5:30 बजे बांकेबिहारी के दर्शन खुलेंगे। रात 10:25 बजे शयनभोग आरती होगी। शरद पूर्णिमा के दिन ठाकुर बांकेबिहारी को खीर, चंद्रकला आदि का भोग निवेदित किया जाएगा।
वहीं, निधिवन राज में सांय 6:30 बजे से महारास का आयोजन किया जाएगा। सेवायत भिक्कीलाल गोस्वामी ने आयोजन की जानकारी दी। राधाबल्लभ मंदिर, सनेह बिहारी, प्रेम मंदिर, यशोदानंदन धाम, श्रीजी की बड़ी कुंज, शाहजी मंदिर में भी ठाकुर जी दर्शन देंगे।
कार्तिक नियम धारण करने वाले श्रद्धालु रविवार सुबह चार बजे से पंचकोसीय परिक्रमा देना प्रारंभ कर देंगे। तीर्थनगरी के सभी प्रमुख मंदिरों में कार्तिक पड़वा 14 अक्तूबर से लेकर 12 नवंबर तक दीपदान का आयोजन किया जाता है। बांकेबिहारी के सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में कार्तिक मास में एक माह तक 1100 दीपक प्रतिदिन बांकेबिहारी के समक्ष प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। इस्कॉन मंदिर, सप्त देवालय में भी दीपदान किया जाएगा।