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दुनिया में मिलेगी पहचान: लुप्त होती ब्रज की कला में पीएम मोदी ने फूंकी जान, सांझी क्राफ्ट को मिला जीआई टैग

Sun, 31 Mar 2024 09:02 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, मथुरा

सार

लुप्त होती ब्रज की कला में पीएम मोदी ने जान फूंक दी। जिले की प्रसिद्ध सांझी क्राफ्ट को जीआई टैग मिला है। इससे इसे ग्लोबल मार्केट में नई पहचान मिलेगी। 
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मथुरा की प्रसिद्ध सांझी क्राफ्ट - फोटो : संवाद
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विस्तार
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तीर्थनगरी मथुरा की प्रसिद्ध सांझी क्राफ्ट को जीआई टैग मिला है। शनिवार देर रात डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह की ओर से इसकी घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि ग्लोबल मार्केट में अब ब्रज की इस कला को अलग पहचान मिलेगी। कामगारों को इसका लाभ मिलेगा। ब्रज के लिए यह गर्व की बात है।

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डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सांझी सांझ, सज्जा, सजावट तथा राधारानी प्रेम की प्रतीत सांझी को भारत सरकार द्वारा जीआई टैग प्रदान किया गया। पुष्टिमार्गीय व बल्लभ कुल से संबंधित कला जो राधा-कृष्ण के प्रेम तथा लीलाओं की प्रतीक है। मोहन वर्मा एवं उनके परिवार की लगन आज सांझी को अपने एक नए रूप की तरफ परिवर्तित कर चुकी हैं। जिस तरह से ब्रज की होली प्रसिद्ध है, उसी तरह सांझी भी ब्रज की एक प्राचीनतम कलाओं में अपना स्थान बना चुकी हैं।

लुप्त होती कला में पीएम मोदी ने फूंकी जान

ब्रज एवं श्रीकृष्ण पर शोध कर रहे महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सांझी कला की शुरुआत ब्रज में हुई। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी ये कला के जानकार अब कम हैं। विलुप्त होती ब्रज की इस प्राचीन कला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2022 में विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई थी। 

उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को सांझी की कृति भेंट कर इसे नई ऊंचाई दी थी। सांझी पेपर कटिंग की कृति मथुरा के स्वर्गीय चैनसुख दास वर्मा के हाथों की बनाई थी। करीब तीन दशक से मंदिरों तक सीमित रह गई इस कला को जीवंत करने के लिए द ब्रज फाउंडेशन ने करीब दस साल पहले प्राचीन ब्रह्मकुंड पर सांझी मेला का आयोजन किया। 
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पुराणों में है उल्लेख 

वृंदावन में सांझीकारों में राधारमण मंदिर और राधावल्लभ मंदिर के सेवायतों के अलावा भट्ट घराना जुड़ा है। पुराणों में उल्लेख है कि द्वापर में शाम के समय जब भगवान श्रीकृष्ण गोचारण करके आते थे, तो ब्रज गोपियां उनके स्वागत के लिए फूलों की चित्रकला (सांझी) सजाकर स्वागत करती थीं। तभी से ब्रज में सांझी कला की शुरुआत पड़ी।
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