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Mathura News: सांपों के प्रति बदल रहा है लोगों का नजरिया

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मथुरा। सूचना पर पहुंची वाइल्डलाइफ एसओएस टीम द्वारा आबादी क्षेत्र से पकड़ा सांप। - फोटो : mathura
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मथुरा। सांप और मानव संघर्ष में अब कमी आ रही है। वाइल्डलाइफ एसओएस के आंकड़ों के अनुसार सांपों के प्रति धीरे-धीरे लोगों का नजरिया बदल रहा है। यही कारण है कि बीते डेढ़ माह में सांप नजर आने पर उसे मारने के बजाय वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना दी गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर सांप को आबादी क्षेत्र से पकड़कर वन क्षेत्र में छोड़ दिया।
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आमतौर पर सांप बिल में रहते हैं। ये बिल आबादी से दूर ही होते हैं। बारिश के मौसम में सांपों के प्राकृतिक आवासों में पानी भर जाता है। ऐसे में मजबूरन वह बिल से निकलकर घरों, स्कूलों, गोदामों और अन्य आबादी वाले क्षेत्रों में शरण के लिए मजबूर होते हैं। यही कारण है कि बारिश के मौसम में सांप आबादी वाले क्षेत्र में ज्यादा नजर आते हैं और सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। दशकों से यह सिलसिला चला आ रहा है। पहले लोग सांप को देखते ही उसे दुश्मन समझकर उसे मार देते थे, लेकिन अब लोगों की सोच बदल रही है। वह समझ रहे हैं कि सांप मजबूरी में आबादी की तरफ आए हैं।
इसकी गवाही वाइल्डलाइफ एसओएस तक पहुंचे मामले दे रहे हैं। 1 जून से लेकर 15 जुलाई तक यानी डेढ़ माह में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों ने सांप नजर आने पर कुल सौ फोन कॉल वाइल्डलाइफ एसओएस को किए। सूचना पर टीम मौके पर पहुंची और सांप को पकड़कर आबादी से दूर वन क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ आई। इसमें 34 भारतीय रैट स्नेक, 23 स्पेक्टेक्ल्ड कोबरा, 21 कॉमन वुल्फ स्नेक और कई अन्य प्रजाति के सांप शामिल हैं। ये सभी सांप बारिश के कारण विस्थापित हो गए थे।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि अब लोग सांप नजर आने पर डर कर प्रतिक्रिया देने के बजाए, अब सुरक्षित और मानवीय समाधान तलाश रहे हैं। यह बदलाव न केवल उत्साहजनक है, बल्कि पारिस्थितिक रूप से सांपों के अस्तित्व के लिए आवश्यक भी है। वहीं सचिव गीता शेषमणि के अनुसार सांप हमारे पारिस्थितिक तंत्र में विशेष रूप से कृंतक (दांतों से कुतरने वाले जीव) आबादी को नियंत्रित करने और खाद्य शृंखला में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व सर्प दिवस केवल इनकी प्रशंसा के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से जानकारी देने के बारे में भी है।
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जहरीलीं नहीं होती सांप की अधिकांश प्रजातियां
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स और सर्प विशेषज्ञ बैजूराज एमवी बताते हैं कि सांपों को अक्सर गलत समझा जाता है। वास्तव में सांप की ज्यादातर प्रजातियां जहरीलीं नहीं होती हैं। इतना ही नहीं सांप उकसाए जाने पर ही इंसानों के संपर्क में आते हैं। हालांकि उन्होंने किसी भी प्रजाति का सांप नजर आने पर उसे पकड़ने या उसके पास जाने के बजाए वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना देने की बात कही। उन्होंने बताया कि सांप को देखकर आमजन के लिए यह निर्णय लेना असंभव है कि कौन सी प्रजाति जहरीली है और कौन सी नहीं। यह केवल विशेषज्ञ ही बता सकते हैं। उन्होंने बताया कि मनुष्यों और सांपों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यशालाएं भी आयोजित की जा रही हैं।
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सांप दिखे तो यहां करें फोन
अगर आपके घर आसपास या क्षेत्र में कहीं सांप नजर आता है तो उसे पकड़ने का प्रयास या मारने के बजाय वाइल्डलाइफ एसओएस के आपातकालीन नंबर 9917109666 पर सूचना दें। टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर आपकी मदद करेगी और सांप को भी सुरक्षित स्थान तक पहुंचाएगी।
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