यमुना किनारे लगाए गए गणगौर मेले में सुहागिनों ने मां पार्वती की पूजा कर पति की रक्षा का वचन लिया और परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। युवतियों ने भी पार्वती मैया को खुश करने के लिए व्रत रखा। पर घर-घर मिट्टी की गणगौर बनाकर पूजा की गई।
गणगौर मेले को लेकर मान्यता है कि मां पार्वती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए गणगौर की पूजा की थी। यमुना किनारे सेठ हवेली में लगे गणगौर मेले में महिलाओं ने मिट्टी की मां पार्वती के स्वरूप में गणगौर की प्रतिमा बनाई और उनका बेहतर तरीके से शृंगार किया।
गणगौर की दूब घास से पूजा अर्चना की, भोग लगाया और मां पार्वती और शिवजी के भजन गाए। पूजा के बाद गणगौर की मिट्टी की प्रतिमाओं को यमुना में प्रवाहित किया गया। मेले में राजस्थान के जैसलमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर, नागौर, अजमेर, बीकानेर सहित अन्य जिलों से हजारों श्रद्धालु इकट्ठे हुए। इस मौके पर नंदलाल चतुर्वेदी, नवीन नागर, निर्भय पुरोहित, संजय पुरोहित आदि का सहयोग रहा।
मेला आयोजक सेठ विजय कुमार और रीना ने बताया कि गणगौर मेला उत्सव राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाता है। इस मेले को उनके पूर्वज राजस्थान से लेकर मथुरा आए थे। 100 साल से अधिक समय से यह मेला उनकी हवेली में हर वर्ष लगता है।